
देहरादून स्थित शिक्षा निदेशालय में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल के साथ हुई मारपीट की घटना के विरोध में राजकीय शिक्षक संघ और मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों ने बैठक कर आक्रोश व्यक्त किया। राज्य कर्मचारी संगठनों ने घटना की निंदा करते हुए इसे सरकारी व्यवस्था पर हमला बताया। हमलावरों की शीघ्र गिरफ्तारी न होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन और कार्यालय बंद करने की चेतावनी दी गई है।
- प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल प्रकरण पर बैठक
- राजकीय शिक्षक संघ और मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों में आक्रोश
- हमलावरों की गिरफ्तारी न होने पर कार्यालय बंद करने की चेतावनी
- शिक्षा विभाग में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
देहरादून | राजधानी देहरादून स्थित शिक्षा निदेशालय में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल के साथ हुई मारपीट की घटना ने शिक्षा विभाग और कर्मचारी संगठनों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। घटना के विरोध में राजकीय शिक्षक संघ और मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों ने आपात बैठक आयोजित कर अपनी रणनीति तय की और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की। बैठक में कर्मचारियों ने कहा कि किसी भी सरकारी कार्यालय में इस प्रकार की घटना अत्यंत निंदनीय है और यह विधि के शासन पर सीधा प्रहार है।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष अरुण पांडे और महामंत्री शक्ति प्रसाद भट्ट ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जब सभी कार्य स्पष्ट नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत संचालित होते हैं, तब इस तरह की अराजकता को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि घटना का विस्तृत विवरण सामने आने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी, लेकिन प्रारंभिक स्तर पर यह स्पष्ट है कि कार्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।
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उन्होंने शासन और प्रशासन से मांग की कि दोषियों की पहचान कर तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इस बीच उत्तराखंड अधिकारी-कर्मचारी-शिक्षक समन्वय समिति ने भी घटना की घोर निंदा की है। सचिव संयोजक पूर्णानंद नौटियाल और शक्ति प्रसाद भट्ट ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो सभी परिसंघों के साथ व्यापक बैठक कर प्रदेश के समस्त सरकारी कार्यालयों को बंद करने पर विचार किया जाएगा।
घटना के बाद शिक्षा विभाग में सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक अनुशासन और अधिकारियों की कार्यस्थल सुरक्षा जैसे मुद्दे फिर चर्चा में आ गए हैं। कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी प्रकार की हिंसा या दबाव की राजनीति को स्वीकार नहीं करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।





