
वन निगम के पश्चिमी वृत्त में कम कीमत पर लकड़ी बिक्री के मामले में प्रबंध निदेशक ने पहली जांच रिपोर्ट को अधूरी मानते हुए दोबारा जांच के निर्देश दिए हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट में 200 से अधिक लॉट में एक करोड़ रुपये से अधिक राजस्व नुकसान का उल्लेख किया गया था। अब तथ्यों और प्रक्रिया की पुनः तथ्यपरक जांच कराई जाएगी।
- पश्चिमी वृत्त में लकड़ी नीलामी पर उठे सवाल
- एमडी ने महाप्रबंधक कुमाऊं को दिए पुनः जांच के निर्देश
- 200 से अधिक लॉट में राजस्व नुकसान का जिक्र
- शिकायतकर्ता और द्वितीय पक्ष का बयान न लेने पर आपत्ति
देहरादून। उत्तराखंड वन विकास निगम के पश्चिमी वृत्त में कम कीमत पर लकड़ी बिक्री के मामले में एक बार फिर जांच होगी। निगम की प्रबंध निदेशक नीना ग्रेवाल ने पूर्व में कराई गई जांच रिपोर्ट को अधूरी मानते हुए पुनः तथ्यपरक जांच के निर्देश दिए हैं। पिछले वर्ष पश्चिमी क्षेत्र में लकड़ी को आधार मूल्य से कम दर पर बेचे जाने की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद प्रबंध निदेशक ने महाप्रबंधक कुमाऊं को मामले की जांच के आदेश दिए थे। करीब चार महीने पहले जांच रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपी गई थी।
सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में 200 से अधिक लॉट में एक करोड़ रुपये से अधिक के संभावित राजस्व नुकसान का उल्लेख किया गया था। साथ ही संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगाए गए थे। हालांकि, प्रबंध निदेशक ने जांच प्रक्रिया में कई कमियां इंगित की हैं। पत्र में कहा गया है कि शिकायतकर्ता का विधिवत बयान दर्ज किया जाना चाहिए था और शिकायत की वास्तविकता पर विस्तृत प्रश्नोत्तर दर्ज किए जाने चाहिए थे। इसके अलावा जांच अधिकारी का पद शिकायत से जुड़े अधिकारियों से एक स्तर ऊंचा होना चाहिए था।
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द्वितीय पक्ष को सुनवाई का अवसर देने और साक्ष्य लेने की प्रक्रिया भी पूरी तरह नहीं अपनाई गई। एमडी ने विशेष रूप से लॉट संख्या-941 से संबंधित अनियमितता की शिकायत का उल्लेख करते हुए कहा है कि जांच उसी लॉट के संदर्भ में प्राथमिकता से की जानी चाहिए थी। साथ ही उन लॉट का भी संज्ञान नहीं लिया गया, जिन्हें पुनः नीलामी में रखे जाने पर अधिक राजस्व प्राप्त हुआ। क्षेत्रीय प्रबंधक और प्रभागीय प्रबंधक को प्रदत्त अधिकारों के उपयोग का भी समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया।
अब महाप्रबंधक कुमाऊं को निर्देशित किया गया है कि सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि राजस्व हानि और प्रक्रिया संबंधी अनियमितताओं की स्पष्ट स्थिति सामने आ सके।








