
उत्तराखंड में 25 अप्रैल से 24 मई के बीच प्रस्तावित मकान गणना के लिए गृह मंत्रालय ने 33 सवालों की अधिसूचना जारी कर दी है, जिनमें घर की संरचना, सुविधाएं, उपभोग और परिवार की बुनियादी जानकारी शामिल है। जनगणना निदेशालय ने जिलावार प्रशिक्षण कार्यक्रम भी तय कर दिए हैं और अधिकारियों को तकनीकी पोर्टल पर प्रशिक्षित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार सभी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय रहेंगी और केवल जनगणना प्रयोजनों के लिए उपयोग होंगी।
- मकान गणना के लिए अधिसूचना जारी, अप्रैल में शुरू होगा सर्वे
- घर की बनावट से लेकर मोबाइल नंबर तक जुटाएगी जनगणना टीम
- चार्ज अधिकारियों का प्रशिक्षण 19 फरवरी से
- सीएमएमएस पोर्टल से होगी डेटा एंट्री, जानकारी रहेगी गोपनीय
देहरादून | उत्तराखंड में आगामी जनगणना प्रक्रिया को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। गृह मंत्रालय की ओर से मकान गणना के लिए 33 बिंदुओं वाली अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिसके तहत राज्य में 25 अप्रैल से 24 मई 2026 के बीच मकान सूचीकरण (हाउस लिस्टिंग) का कार्य प्रस्तावित है। इस चरण में प्रत्येक आवासीय भवन और उसमें रहने वाले परिवारों से विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। मकान गणना के दौरान अधिकारियों द्वारा घर की भौतिक संरचना से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी, जिसमें फर्श, दीवार और छत में प्रयुक्त सामग्री, मकान की स्थिति और उपयोग जैसे बिंदु शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त मकान स्वामित्व की स्थिति, उपलब्ध कमरों की संख्या, परिवार में रहने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या, विवाहित दंपतियों की संख्या और परिवार के मुखिया से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी। सुविधाओं के संदर्भ में पेयजल के मुख्य स्रोत, प्रकाश की व्यवस्था, शौचालय और बाथरूम की उपलब्धता, गंदे पानी की निकासी व्यवस्था तथा रसोईघर और एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधाओं का विवरण भी लिया जाएगा। इतना ही नहीं, परिवार के पास उपलब्ध उपभोक्ता वस्तुएं जैसे रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट, कंप्यूटर, मोबाइल फोन और वाहन संबंधी जानकारी भी एकत्र की जाएगी।
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इस बार एक महत्वपूर्ण प्रश्न परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज से जुड़ा है, जिससे पोषण और उपभोग पैटर्न का आकलन किया जा सकेगा। साथ ही मोबाइल नंबर भी केवल जनगणना संबंधी सूचना के लिए दर्ज किया जाएगा। जनगणना निदेशालय के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के लिए जिलावार प्रशिक्षण 19 से 28 फरवरी के बीच आयोजित किए जाएंगे। इन प्रशिक्षणों में चार्ज अधिकारी, सहायक चार्ज अधिकारी, तकनीकी सहायक और सेंसस क्लर्क को नए प्रावधानों, प्रक्रियाओं और तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जाएगी।
डेटा संकलन और मॉनिटरिंग के लिए सीएमएमएस पोर्टल का उपयोग किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनेगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान प्राप्त सभी जानकारियां पूर्णतः गोपनीय रहेंगी और किसी भी स्तर पर साझा नहीं की जाएंगी। इन आंकड़ों का उपयोग केवल सांख्यिकीय और नीतिगत उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। राज्य सरकार और जनगणना विभाग का उद्देश्य है कि यह प्रक्रिया समयबद्ध, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ तरीके से संपन्न हो, ताकि भविष्य की विकास योजनाओं के लिए सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकें।






