
गौहरीमाफी क्षेत्र में बिरला मंदिर के समीप नदी किनारे एक घायल हाथी देखा गया, जिसके पैर में गहरी चोट थी। ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी, लेकिन रेस्क्यू को लेकर सवाल खड़े हुए। राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बताया कि हाथी की मॉनिटरिंग की जा रही है और उपचार के प्रयास जारी हैं।
- बिरला मंदिर के पास नदी किनारे मिला घायल हाथी
- सीमा विवाद में उलझा वन विभाग, दिनभर खड़ा रहा दर्द से कराहता हाथी
- ग्रामीणों ने बनाया वीडियो, मदद की गुहार लगाता दिखा गजराज
- राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने कहा—मॉनिटरिंग जारी
देहरादून। उत्तराखंड के गौहरीमाफी क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया जब ग्रामीणों ने सुबह तड़के नदी किनारे एक घायल हाथी को देखा। जानकारी के अनुसार बिरला मंदिर के समीप हाथी खड़ा मिला, जिसके एक पैर में गहरी चोट थी। वह घायल पैर को घसीटते हुए बड़ी मुश्किल से चल पा रहा था और कई बार संतुलन खोकर गिरते-गिरते बचा। हाथी की दयनीय स्थिति देखकर ग्रामीणों ने चिंता जताई और तुरंत वन विभाग को सूचना दी। इस दौरान कुछ लोगों ने उसका वीडियो भी बनाया, जिसमें वह दर्द से कराहता और बीच-बीच में चिंघाड़ता नजर आया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाथी का व्यवहार ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वह मदद की गुहार लगा रहा हो। सबसे चिंताजनक पहलू तब सामने आया जब यह आरोप लगा कि मौके पर मौजूद वनकर्मी हाथी को उपचार उपलब्ध कराने के बजाय उसे अपनी-अपनी सीमा में प्रवेश से रोकते रहे। बताया गया कि जैसे ही हाथी किसी एक दिशा में बढ़ता, उसे वापस खदेड़ दिया जाता। इस खींचतान के बीच पूरा दिन बीत गया और घायल हाथी नदी तट पर ही खड़ा रहा।
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ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि इतने गंभीर मामले में तत्काल रेस्क्यू टीम क्यों सक्रिय नहीं की गई और उच्च अधिकारियों को तुरंत सूचना क्यों नहीं दी गई। उनका कहना है कि वन्यजीव संरक्षण के दावों के बीच इस तरह की लापरवाही चिंताजनक है। वहीं राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोशे ने बताया कि हाथी की पिछले करीब एक सप्ताह से मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि वह आबादी क्षेत्र में प्रवेश न करे। उन्होंने कहा कि घायल हाथी के उपचार के प्रयास किए जा रहे हैं और ऐसे हाथी इस क्षेत्र में अक्सर देखे जाते हैं।
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यह घटना एक बार फिर मानव-वन्यजीव प्रबंधन और रेस्क्यू तंत्र की तत्परता को लेकर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि घायल वन्यजीवों के मामले में त्वरित चिकित्सकीय हस्तक्षेप और समन्वित कार्रवाई आवश्यक है, ताकि न केवल जानवर की जान बचाई जा सके, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में संभावित खतरे को भी टाला जा सके।





