
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर धर्म और कठोर प्रशासनिक रवैये के मिश्रण से राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की नीतियों से अलग रुख अपनाने वाले मीडिया संस्थानों पर नोटिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई होती है। भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक बयानबाजी बताया है, जिससे मीडिया स्वतंत्रता और लोकतंत्र पर बहस तेज हो गई है।
- मीडिया की स्वतंत्रता पर छिड़ी नई सियासी बहस
- विपक्ष का आरोप: असहमति जताने वालों पर होती है कार्रवाई
- भाजपा ने आरोपों को बताया राजनीतिक बयानबाजी
- सीबीआई और ईडी के इस्तेमाल को लेकर उठा विवाद
राज शेखर भट्ट
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की राजनीति को केवल सामान्य राजनीतिक गतिविधि नहीं कहा जा सकता, क्योंकि उसमें धर्म और कठोर प्रशासनिक रवैये का मिश्रण दिखाई देता है। अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि यदि कोई न्यूज चैनल, समाचार पत्र या सोशल मीडिया मंच सरकार की नीतियों से अलग दृष्टिकोण अपनाता है, तो उसे देशविरोधी करार देने की कोशिश की जाती है।
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उनके अनुसार ऐसे मामलों में संबंधित संस्थानों के खिलाफ नोटिस जारी होते हैं और जांच एजेंसियों की कार्रवाई शुरू हो जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों जैसे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का इस्तेमाल असहमति रखने वालों पर दबाव बनाने के लिए किया जाता है। अखिलेश यादव ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति तानाशाही की ओर संकेत करती है।
इन बयानों के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि मीडिया की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठना गंभीर विषय है। वहीं भाजपा की ओर से इन आरोपों को निराधार और राजनीतिक बयानबाजी करार दिया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जांच एजेंसियां कानून के तहत स्वतंत्र रूप से काम करती हैं और किसी भी कार्रवाई का संबंध तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया से होता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक स्तर पर मीडिया की स्वतंत्रता, सरकारी एजेंसियों की भूमिका और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती जैसे मुद्दों को सामने ला रहा है। आने वाले समय में यह बहस और गहराने की संभावना है।









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