
आलेख में वैलेंटाइन डे के ऐतिहासिक महत्व, संत वैलेंटाइन के बलिदान और रोम से इसकी शुरुआत का उल्लेख किया गया है। वर्तमान समय में इसके बदलते स्वरूप, भारतीय समाज में स्वीकृति और व्यावसायिक प्रभाव पर विचार प्रस्तुत किए गए हैं। लेख प्रेम के वास्तविक अर्थ और सावधानी की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है।
- संत वैलेंटाइन के बलिदान से जुड़ा प्रेम दिवस
- रोम से भारत तक वैलेंटाइन डे की परंपरा
- प्रेम के प्रतीक दिवस का बदलता सामाजिक स्वरूप
- उत्सव, इतिहास और बाजारवाद के बीच वैलेंटाइन डे
आशी प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
प्रेम दिवस के रूप में मनाया जाने वाला उत्सव एक ऐतिहासिक महत्व भी रखता है। इसका नाम संत वैलेंटाइन के नाम पर रखा गया। यह एक रोम फेस्टिवल से शुरू हुआ। इस दिन वैवाहिक पुरुष-स्त्री एक-दूसरे के समक्ष अपने प्रेम का इजहार किया करते हैं। आज भी रोम के कई शहरों में सामूहिक विवाह का आयोजन वैलेंटाइन दिवस के रूप में किया जाता है, इसलिए इसे उत्सव रूप में मनाया जाता है। परंतु वैलेंटाइन डे मनाने के पीछे का ऐतिहासिक महत्व शायद ही बहुत कम लोग जानते हैं।
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संत वैलेंटाइन की स्मृति के रूप में मनाया जाने वाला पर्व, जिसे युवाओं ने अपने प्रेम-मोहब्बत के लिए प्रचलित कर दिया, क्योंकि वैलेंटाइन डे पर एक ऐसे संत को फांसी दी गई थी जिन्होंने समाज की कुरीतियों के खिलाफ जाकर कार्य किया। सूत्रों के अनुसार उन्होंने रोम के राजा “किंग क्लाउडियस” की कटु मानसिकता के खिलाफ जाकर कई सैनिकों की शादी करवाई, ताकि वे जब घर वापस लौटें तो उनके जीवन में उनका कोई हमसफर हो। रोम के राजा “क्लाउडियस” प्रेम विवाह के खिलाफ थे। उनका मानना था कि यदि सैनिकों का विवाह होने लगेगा तो सेना पर इसका प्रभाव पड़ेगा और वह कमजोर हो जाएगी।
वहीं वैचारिक रूप से संत वैलेंटाइन प्रेम का खुलकर प्रचार-प्रसार किया करते थे। संत वैलेंटाइन के अनुसार प्रेम जीवन में महत्व रखता है, आंतरिक खुशी देता है। वह वैचारिक रूप से राजा के खिलाफ थे। उनके प्रेम के प्रति प्रचार-प्रसार और शादी को लेकर गंभीरता दिखाने के कारण ही 14 फरवरी के दिन संत वैलेंटाइन को फांसी की सजा सुना दी गई। यह ऐतिहासिक घटना रही। इसके बाद पांचवीं शताब्दी में रोम के “पोप गेलेयसियस” ने 14 फरवरी को सेंट वैलेंटाइन डे के नाम से घोषित कर दिया और रोम के कई बड़े शहरों में इस दिन सामूहिक विवाह के बड़े आयोजन किए जाने लगे। इस प्रकार यह दिवस शादी करने वाले जोड़ों एवं अपने प्रेम का इजहार करने वालों के लिए खास हो गया।
वर्तमान में वैलेंटाइन डे का स्वरूप बदल गया है। जहां एक ओर इसकी आड़ में बच्चे गलत मार्ग चुनकर अपने संस्कारों को बलि चढ़ा देना संत वैलेंटाइन के अपमान के बराबर है, वहीं दूसरी ओर आज भारत ने इसे आत्मीयता से स्वीकार कर लिया है। इस दिन सिर्फ प्रेमी-प्रेमिका ही नहीं, बल्कि हर रिश्ते को सम्मान देते हुए यह त्योहार मनाया जाने लगा है। लोग अपने माता-पिता, भाई-बहन के साथ समय बिताकर उनसे लगाव का भाव स्पष्ट करते हैं और उपहार भी देते हैं। यहां तक कि लोग अपने भगवान को भी इस दिन प्रेम के उपहार अर्पित करते हैं। यह भक्ति ही है कि भारत में हर त्योहार में भावनाओं को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है।
आज भारत में भी वैलेंटाइन डे 14 फरवरी के दिन बहुत धूमधाम से मनाया जाने लगा है। इसमें कई लड़के-लड़कियां साथ मिलकर मरने-जीने की कसमें खाते हैं और कई लोग प्रेम का इजहार करने के लिए इसी दिन को चुनना पसंद करते हैं। यदि कहा जाए तो वैलेंटाइन डे का मनाया जाना भारत में अब बहुत प्रचलित हो गया है। लेकिन इसके पीछे का सत्य यह भी है कि कई लड़के-लड़कियां अपने माता-पिता से झूठ बोलकर गलत रिश्तों को प्रेम का नाम दे देते हैं। इसलिए अपनी भावनाएं किसी के सामने समर्पित करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। यह त्योहार प्रेम के लिए है, छलावे के लिए नहीं।
आधुनिक भारत में यदि प्रेम की बात आती है तो व्यवसाय कैसे पीछे रह सकता है। आज कई व्यावसायिक कंपनियां भी इस त्योहार का साप्ताहिक प्रचार-प्रसार जोर-शोर से करती हैं। इन मनमोहक विज्ञापनों से प्रभावित होकर लोग वैलेंटाइन डे से पहले ही चॉकलेट डे, टेडी डे, प्रपोज डे आदि के लिए विशेष उपहार तैयार करते हैं। इससे व्यावसायिक रूप से काफी लाभ होता है। प्रेम के त्योहार को मनाने के लिए विभिन्न थीम पर गिफ्ट उपलब्ध होने के कारण कंपनियों को बड़े स्तर पर मुनाफा होता है।
वास्तविक रूप में देखा जाए तो वैलेंटाइन डे प्रेम का प्रतीक माना जाना चाहिए। मनुष्य हमेशा भावनाओं को प्रथम रखता है, इसीलिए यह दिवस प्रेम का प्रतीक मानकर वर्तमान में अत्यंत प्रचलित है।
©® आशी प्रतिभा (स्वतंत्र लेखिका)
मध्य प्रदेश, ग्वालियर
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