
उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है, जिसमें 20 आईपीएस अधिकारियों के तबादले हुए हैं। अजय सिंह को देहरादून के एसएसपी पद से हटाकर एसटीएफ भेजा गया, जबकि प्रमेंद्र डोबाल को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपराध नियंत्रण के लिए सख्त निर्देश दिए हैं।
- उत्तराखंड पुलिस में बड़ा फेरबदल, 20 आईपीएस के तबादले
- आठ जिलों के कप्तान बदले, कानून-व्यवस्था पर फोकस
- एसटीएफ, विजिलेंस और एसडीआरएफ में भी बदलाव
- 48 घंटे में दो हत्याओं के बाद सरकार की सख्ती
देहरादून। प्रदेश में हाल के दिनों में बढ़ती आपराधिक घटनाओं के बीच सरकार ने पुलिस महकमे में व्यापक बदलाव किया है। सचिव गृह शैलेश बगोली द्वारा जारी आदेश के अनुसार 20 आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं, जिनमें आठ जिलों के कप्तान शामिल हैं। राजधानी देहरादून में 48 घंटे के भीतर दो हत्याओं के बाद सख्त कदम उठाते हुए एसएसपी अजय सिंह को हटा दिया गया है। उन्हें अब एसएसपी एसटीएफ बनाया गया है। उनकी जगह हरिद्वार के एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल को देहरादून की कमान सौंपी गई है।
अन्य प्रमुख तबादले
- एसटीएफ के एसएसपी नवनीत सिंह को हरिद्वार का एसएसपी बनाया गया।
- ऊधमसिंह नगर के एसएसपी मणिकांत मिश्रा को एसपी अभिसूचना नियुक्त किया गया।
- अजय गणपति कुम्भार को ऊधमसिंह नगर का नया एसएसपी बनाया गया।
- रेखा यादव को चंपावत भेजा गया, जबकि अक्षय प्रहलाद कोण्डे को पिथौरागढ़ की जिम्मेदारी दी गई।
- निहारिका तोमर को रुद्रप्रयाग का एसपी बनाया गया।
- जितेंद्र कुमार मेहरा को एसपी बागेश्वर और चंद्रशेखर आर घोड़के को एसएसपी अल्मोड़ा नियुक्त किया गया।
इसके अलावा विजिलेंस, एसडीआरएफ, सीबीसीआईडी और पीएसी में भी कई अहम बदलाव किए गए हैं। निवेदिता कुकरेती को एसडीआरएफ में आईजी बनाया गया, जबकि प्रह्लाद नारायण मीणा को डीआईजी विजिलेंस की जिम्मेदारी दी गई।
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कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अपराध पर केवल घटना के बाद प्रतिक्रिया देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूर्व-निवारक रणनीति को भी मजबूत किया जाए। उन्होंने मुखबिर तंत्र को सक्रिय करने, अपराधियों में कानून का भय स्थापित करने और आम नागरिकों का पुलिस पर विश्वास बढ़ाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन बिना भय के अपनी शिकायत पुलिस तक पहुंचा सके और उन्हें त्वरित न्याय मिले, यह सरकार की प्राथमिकता है।
संदेश स्पष्ट: अपराध पर जीरो टॉलरेंस
लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं के बाद यह प्रशासनिक फेरबदल सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का संकेत माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाए और अपराधियों के लिए कोई स्थान न बचे।







