
पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग विकासखंड स्थित कोलेख गांव में आजादी के 79 साल बाद पहली बार सरकारी पेयजल आपूर्ति पहुंची, जिससे छह परिवारों को बड़ी राहत मिली है। अब ग्रामीणों को आधा किलोमीटर दूर गधेरे से पानी लाने की मजबूरी नहीं रहेगी। जल संस्थान के प्रयासों पर ग्रामीणों ने खुशी जताते हुए अधिकारियों का फूल-मालाओं से स्वागत किया।
- पिथौरागढ़: आधा किमी दूर से पानी ढोने की मजबूरी खत्म
- आजादी के दशकों बाद कोलेख गांव की प्यास बुझी
- जल संस्थान के प्रयास से बदली छह परिवारों की जिंदगी
- ‘अब गधेरे से पानी नहीं लाना पड़ेगा’—ग्रामीणों की छलकी खुशी
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ जनपद के बेरीनाग विकासखंड अंतर्गत राईगड़स्यारी ग्राम पंचायत के तोक गांव कोलेख में आजादी के लगभग आठ दशक बाद पहली बार सरकारी पेयजल आपूर्ति पहुंची है। अनुसूचित जाति बहुल इस छोटे से गांव में जलधारा पहुंचते ही ग्रामीणों की आंखें खुशी से छलक उठीं। वर्षों से पानी के लिए संघर्ष कर रहे छह परिवारों के लिए यह किसी ऐतिहासिक क्षण से कम नहीं था।
कोलेख गांव तहसील मुख्यालय से करीब नौ किलोमीटर दूर ऊंचाई पर स्थित है। यहां रहने वाले परिवारों को अब तक रोजाना आधा किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर गधेरे से पानी लाना पड़ता था। विशेषकर शीतकाल में यह कार्य अत्यंत कठिन हो जाता था। महिलाओं और बुजुर्गों को सुबह-सुबह पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता था, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित होता था।
Government Advertisement...
राईआगर में आयोजित ‘जन जन की सरकार, जन जन के द्वार’ शिविर के दौरान जब ग्रामीणों ने जलापूर्ति की जानकारी साझा की तो उनके चेहरे पर संतोष और उत्साह साफ झलक रहा था। गांव पहुंचे जल संस्थान डीडीहाट के अभियंताओं का ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से स्वागत किया और इस प्रयास को ‘भागीरथ कार्य’ बताया।
अपर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने अधिशासी अभियंता संदीप चतुर्वेदी और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने इसे अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
ग्रामीण लीला देवी ने भावुक होकर कहा कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि उनके गांव तक भी सरकारी पानी पहुंचेगा। वहीं ज्योति देवी ने बताया कि अब सुबह उठते ही दूर गधेरे तक नहीं जाना पड़ेगा और सर्दियों में होने वाली कठिनाइयों से राहत मिलेगी।
सरकारी जलापूर्ति की इस पहल ने कोलेख गांव के छह परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव ला दिया है। यह उदाहरण दर्शाता है कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन दूरस्थ क्षेत्रों में भी बुनियादी सुविधाओं की तस्वीर बदल सकता है।






