
जाधवपुर लोकसभा सांसद सायनी घोष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर रोजगार के वादों, शैक्षणिक योग्यता और 2014 के बाद की उपलब्धियों को लेकर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े-बड़े दावों के बावजूद युवाओं को अपेक्षित परिणाम नहीं मिले और कई मुद्दों पर स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया। वीडियो इन बयानों को प्रस्तुत करता है और किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं करता, बल्कि दर्शकों को स्वयं विचार करने का अवसर देता है।
- जाधवपुर सांसद सायनी घोष ने पीएम मोदी से मांगा जवाब
- रोजगार, डिग्री और उपलब्धियों पर केंद्र से तीखे सवाल
- सायनी घोष का आरोप: दावे बड़े, जमीनी हकीकत अलग
- संसद से सड़क तक: मोदी सरकार पर विपक्ष का प्रहार
राज शेखर भट्ट
जाधवपुर लोकसभा क्षेत्र की सांसद सायनी घोष ने एक हालिया बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। एक शॉर्ट वीडियो में दिए गए उनके वक्तव्य में रोजगार, युवाओं के भविष्य और सरकार की उपलब्धियों को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
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सायनी घोष ने कहा कि वर्ष 2014 के आम चुनावों के दौरान युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराने का वादा किया गया था, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में युवा स्थायी और गुणवत्तापूर्ण रोजगार की तलाश में हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि इन वादों की दिशा में अब तक ठोस और पारदर्शी प्रगति क्यों नहीं दिखाई देती।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्रधानमंत्री की शैक्षणिक योग्यता को लेकर पूर्व में उठे विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में सवाल पूछना विपक्ष की जिम्मेदारी है और सरकार का कर्तव्य है कि वह स्पष्ट और तथ्यात्मक उत्तर दे।
सायनी घोष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की ओर से कई बड़ी घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके प्रभाव का आकलन अलग तस्वीर प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि युवाओं की अपेक्षाएं और वास्तविक स्थिति के बीच की दूरी चिंता का विषय है। हालांकि, केंद्र सरकार और भाजपा की ओर से समय-समय पर विभिन्न योजनाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों और रोजगार सृजन के आंकड़ों को उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है।
ऐसे में राजनीतिक विमर्श में दावे और प्रतिदावे दोनों ही सामने आते हैं। यह वीडियो किसी निष्कर्ष पर पहुंचने का दावा नहीं करता, बल्कि सांसद द्वारा उठाए गए सवालों और राजनीतिक बयान को दर्शकों के सामने रखता है। लोकतंत्र में स्वस्थ बहस और जवाबदेही की परंपरा को ध्यान में रखते हुए यह आवश्यक है कि नागरिक विभिन्न पक्षों को सुनें, तथ्यों की जांच करें और अपनी स्वतंत्र राय बनाएं।








