
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2022 चुनावों के दौरान फैलाई गई जमीन छीने जाने की अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि किसी की भूमि अधिग्रहित नहीं की गई है। वहीं दूसरी ओर, एक वायरल वीडियो में बिना आधिकारिक आदेश के जमीन पर कब्जे के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे विवाद गहरा गया है। इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज है और प्रशासनिक भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
- 2022 चुनाव और जमीन अफवाहों पर धामी की सफाई
- उत्तराखंड में जमीन विवाद: दावे और प्रतिदावे
- सीएम धामी बोले– क्या किसी की जमीन छीनी गई?
- वायरल वीडियो से बढ़ी सियासी गर्मी, सरकार पर सवाल
राज शेखर भट्ट
उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर जमीन और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय विपक्षी दलों और कुछ समूहों द्वारा यह अफवाह फैलाई गई थी कि यदि भारतीय जनता पार्टी दोबारा सत्ता में आती है तो आम जनता और विशेष रूप से जनजातीय समुदायों की जमीनें छीन ली जाएंगी।
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मुख्यमंत्री धामी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने जनता से सवाल किया कि क्या वास्तव में किसी नागरिक या जनजातीय परिवार की जमीन सरकार ने छीनी है। उनके अनुसार, चुनावी माहौल में भ्रम फैलाने के उद्देश्य से ऐसी बातें कही गई थीं, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं था।
हालांकि, इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें बिना किसी स्पष्ट आधिकारिक आदेश के एक व्यक्ति के खेत पर कब्जा किए जाने का दावा किया जा रहा है। वीडियो में कथित तौर पर कुछ लोग जमीन पर कार्रवाई करते दिखाई दे रहे हैं, जिससे प्रशासन की भूमिका और जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय स्तर पर यह मामला राजनीतिक रूप ले चुका है। विपक्षी दल सरकार से पारदर्शिता और जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से यह कहा जा रहा है कि यदि कोई अवैध कब्जा या विवाद सामने आता है तो उसे कानून के दायरे में सुलझाया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन से जुड़े मामलों में तथ्यात्मक जांच और आधिकारिक दस्तावेजों का महत्व सबसे अधिक होता है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श का केंद्र बना हुआ है। सरकार, प्रशासन और संबंधित पक्षों से स्पष्ट जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। यह वीडियो इसी पूरे घटनाक्रम, बयानों और आरोपों को दर्शकों के सामने संतुलित रूप में प्रस्तुत करता है।









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