
यह आलेख बिहार के गौरवशाली ऐतिहासिक योगदान, वर्तमान विकास प्रयासों और भविष्य की संभावनाओं को समग्र रूप से प्रस्तुत करता है। इसमें राज्य के सामने मौजूद चुनौतियों, सामाजिक परिवर्तन, महिला सशक्तिकरण, कृषि, पर्यटन और तकनीकी विकास की दिशा में उठाए जा रहे कदमों का विश्लेषण किया गया है। लेख बिहार के पुनरुत्थान को भारत के समग्र विकास से जोड़कर देखता है।
- प्राचीन वैभव से विकास की राह पर बिहार
- बदलता बिहार: संघर्ष, संकल्प और संभावनाएँ
- बीमारू से विकास मॉडल तक बिहार की यात्रा
- इतिहास, संघर्ष और उभरता नया बिहार
सत्येन्द्र कुमार पाठक
बिहार—यह केवल भारत के मानचित्र पर अंकित एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि भारतीय मेधा, आध्यात्म और राजनीति की जननी है। गंगा की अविरल धारा के समान ही बिहार का इतिहास भी प्राचीन और गौरवशाली रहा है। ‘विहार’ (बौद्ध भिक्षुओं के ठहरने का स्थान) शब्द से निकला यह नाम आज एक ऐसे राज्य की कहानी कहता है जो अपने खोए हुए वैभव को पाने के लिए पूरी शिद्दत से संघर्ष कर रहा है। आज का बिहार अपने अतीत की नींव पर भविष्य का एक आधुनिक महल बनाने को आतुर है। बिहार का इतिहास वह धुरी है जिस पर प्राचीन भारत का चक्र घूमता था। यह वह काल था जब विश्व की सभी राहें पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) की ओर जाती थीं।
Government Advertisement...
प्राचीन काल में मगध साम्राज्य ने भारत को पहली बार एक राजनीतिक सूत्र में पिरोया। चंद्रगुप्त मौर्य के पराक्रम और चाणक्य की कूटनीति ने विदेशी आक्रांताओं को खदेड़कर एक अखंड भारत की नींव रखी। सम्राट अशोक ने इसी माटी से ‘युद्ध घोष’ को ‘धम्म घोष’ में बदला और पूरी दुनिया को शांति और अहिंसा का संदेश दिया। इतना ही नहीं, वैशाली की धरती ने दुनिया को ‘गणतंत्र’ (Republic) का पहला पाठ पढ़ाया, जो आज भी वैश्विक लोकतंत्र का आधार है।
जब दुनिया के अधिकांश हिस्से अज्ञानता के अंधेरे में थे, तब बिहार के नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय ज्ञान की मशाल जला रहे थे। यहाँ दस हजार छात्र और दो हजार शिक्षक मिलकर शोध और चिंतन करते थे। इसी भूमि पर आर्यभट्ट ने ‘शून्य’ का आविष्कार किया और खगोल विज्ञान की नई परिभाषाएँ लिखीं। बिहार वह पवित्र स्थल है जहाँ राजकुमार सिद्धार्थ ने तपस्या की और ‘बुद्ध’ कहलाए। जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर की यह जन्मस्थली और निर्वाण स्थली है। सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म पटना की इसी पावन धरती पर हुआ, जो आज भी ‘तख्त श्री पटना साहिब’ के रूप में विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। बिहार ज्ञान, मोक्ष और गणतंत्र स्थली रही है।
मध्यकाल और औपनिवेशिक काल के बाद बिहार ने एक लंबा कठिन दौर देखा। राजनीतिक अस्थिरता, बाढ़, गरीबी और पलायन जैसे शब्दों ने बिहार की पहचान को धूमिल करने की कोशिश की, लेकिन पिछले दो दशकों में बिहार ने एक ‘फिनिक्स’ पक्षी की तरह राख से उठने का साहस दिखाया है। आज बिहार के गाँवों तक बिजली पहुँच चुकी है और सड़कों का जाल बिछाया जा चुका है। गंगा नदी पर बने विशाल सेतु उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच की दूरी को कम कर रहे हैं। ‘सात निश्चय’ जैसी योजनाओं ने स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता के स्तर को सुधारा है। ‘हर घर नल का जल’ योजना ने ग्रामीण जीवन स्तर में क्रांतिकारी बदलाव किया है। बिहार ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में देश को रास्ता दिखाया है। पंचायतों में महिलाओं को 50% आरक्षण देने वाला यह पहला राज्य बना। ‘जीविका’ समूहों के माध्यम से करोड़ों महिलाएँ आज आत्मनिर्भर हैं। ‘साइकिल योजना’ ने न केवल लड़कियों को स्कूल पहुँचाया, बल्कि उनमें एक नया आत्मविश्वास भी भरा है।
सकारात्मक बदलावों के बावजूद पलायन आज भी बिहार की सबसे बड़ी पीड़ा है। बिहार का युवा, जो अपनी मेहनत से दूसरे राज्यों की जीडीपी बढ़ाता है, अपने ही घर में रोजगार की तलाश में है। इसके साथ ही, उत्तर बिहार की हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ और दक्षिण बिहार का सूखा अर्थव्यवस्था को पटरी से उतार देता है। ये चुनौतियाँ आज के बिहार के सामने सबसे बड़ी दीवार बनकर खड़ी हैं। बिहार का भविष्य अब उसकी पुरानी ‘बीमारू’ छवि को छोड़कर एक आधुनिक और विकसित प्रदेश बनने की ओर अग्रसर है। आने वाले समय में बिहार की शक्ति के तीन मुख्य स्तंभ होंगे: कृषि, पर्यटन और तकनीक। बिहार की मिट्टी सोना उगलती है। यहाँ की जलवायु मखाना, लीची, केला और आम के लिए वरदान है। भविष्य का बिहार ‘फूड प्रोसेसिंग’ का बड़ा केंद्र बनेगा। एथेनॉल क्रांति: मक्का उत्पादन में अग्रणी होने के कारण बिहार देश का एथेनॉल हब बन रहा है, जिससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि प्रदूषण मुक्त ईंधन भी मिलेगा।
मखाना का वैश्विक ब्रांड: मिथिला के मखाने को मिला ‘जीआई टैग’ इसे दुनिया के डाइनिंग टेबल तक पहुँचा रहा है। बिहार का पर्यटन उसकी सबसे बड़ी संपत्ति है। ‘रामायण सर्किट’, ‘बुद्धिस्ट सर्किट’ और ‘जैन सर्किट’ के माध्यम से बिहार दुनिया के करोड़ों पर्यटकों को अपनी ओर खींच सकता है। राजगीर में बना ग्लास ब्रिज और जू सफारी इस बात के प्रमाण हैं कि बिहार अब आधुनिक पर्यटन के लिए तैयार है। यह क्षेत्र लाखों युवाओं के लिए गाइड, होटल व्यवसायी और परिवहन के रूप में रोजगार के द्वार खोलेगा। बिहार का युवा अब केवल सरकारी नौकरी के पीछे नहीं भाग रहा। पटना के ‘बी-हब’ और छोटे शहरों से निकल रहे स्टार्टअप्स इस बात का संकेत हैं कि बिहार का ‘ब्रेन-ड्रेन’ अब ‘ब्रेन-गेन’ में बदल रहा है। आईटी टावर और तकनीक आधारित शिक्षा के माध्यम से बिहार आने वाले समय में एक बड़ा ‘सर्विस हब’ बन सकता है।
भविष्य का बिहार औद्योगिक रूप से समृद्ध होगा। टेक्सटाइल और लेदर नीति के तहत मुजफ्फरपुर और बेतिया जैसे जिलों में क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। ‘चनपटिया मॉडल’ ने दिखाया है कि अगर मजदूरों को सही माहौल मिले, तो वे अपने ही गाँव में वैश्विक स्तर के उत्पाद बना सकते हैं। बिहार की संस्कृति उसकी आत्मा है। मधुबनी पेंटिंग आज केवल घरों की दीवारों पर नहीं, बल्कि न्यूयॉर्क और टोक्यो की आर्ट गैलरी में सजी है। भागलपुरी सिल्क की चमक दुनिया के फैशन रैंप पर दिखाई देती है। लोक संगीत में शारदा सिन्हा की आवाज और लोक कला में भिखारी ठाकुर का ‘विदेसिया’ बिहार की मिट्टी की सुगंध को दुनिया भर में फैलाते हैं। छठ महापर्व आज एक वैश्विक उत्सव बन चुका है, जो स्वच्छता, अनुशासन और प्रकृति पूजा का सबसे बड़ा उदाहरण है।
बिहार का अतीत प्रेरणादायी था, वर्तमान संघर्षशील है, लेकिन भविष्य बेहद उज्ज्वल है। बिहार को आगे बढ़ने के लिए अब जाति और धर्म की राजनीति से ऊपर उठकर ‘विकासवाद’ को अपनाना होगा। बिहार का भविष्य उन लाखों छात्रों की आँखों में है जो मोमबत्ती की रोशनी में पढ़कर यूपीएससी (UPSC) टॉप करते हैं। यह उन महिला उद्यमियों के हाथों में है जो छोटे समूहों से निकलकर करोड़ों का कारोबार कर रही हैं। यह उस किसान के पसीने में है जो बाढ़ और सुखाड़ के बाद भी फिर से बीज बोने का साहस रखता है। जब बिहार के पास अपना ‘शासन’, अपना ‘संसाधन’ और अपनी ‘श्रम शक्ति’ (Labour Power) का सही तालमेल होगा, तब बिहार को फिर से ‘विश्व गुरु’ बनने से कोई नहीं रोक पाएगा। बिहार का उत्थान केवल एक राज्य की प्रगति नहीं होगी, बल्कि यह भारत के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के सपने का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। जिस दिन बिहार बदल जाएगा, उस दिन भारत का भाग्य अपने आप संवर जाएगा।






