
समाजवादी पार्टी की विधायक रागिनी सोनकर ने अपने भाषण में मोदी सरकार पर तीखा हमला करते हुए संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों की बात कही। उन्होंने राहत इंदौरी की पंक्तियां उद्धृत करते हुए देश की एकता और संवैधानिक अधिकारों पर जोर दिया। उनका यह बयान सत्ता के खिलाफ विरोध और राजनीतिक बहस को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
- रागिनी सोनकर का बेबाक भाषण, सरकार पर साधा निशाना
- राहत इंदौरी की पंक्तियों के साथ विधायक का सियासी संदेश
- लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर रागिनी सोनकर का जोर
- सपा विधायक के बयान से तेज हुई राजनीतिक चर्चा
राज शेखर भट्ट
समाजवादी पार्टी की विधायक रागिनी सोनकर का एक बेबाक और जोरदार भाषण इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। एक यूट्यूब शॉर्ट्स वीडियो में सामने आए इस भाषण में उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला करते हुए अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट रूप से सामने रखा। उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दिया है और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। अपने संबोधन में रागिनी सोनकर ने कहा कि वे और उनकी पार्टी डरने वालों में से नहीं हैं तथा अन्याय और गलत नीतियों के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।
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उन्होंने आत्मविश्वास से कहा कि वे लड़ेंगे और जीत हासिल करेंगे। उनके इस बयान को सत्ता के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष और विपक्ष की आक्रामक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। विधायक ने अपने भाषण के दौरान मशहूर शायर राहत इंदौरी की प्रसिद्ध पंक्तियों— “सभी का खून शामिल है यहां की मिट्टी में, किसी के बाप का हिन्दुस्तान नहीं है”—का उल्लेख किया। इस उद्धरण के माध्यम से उन्होंने देश की एकता, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर दिया।
उनके अनुसार, भारत सभी नागरिकों का देश है और संविधान सभी को समान अधिकार प्रदान करता है। रागिनी सोनकर ने अपने संबोधन में लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि देश की ताकत उसकी विविधता और लोकतांत्रिक व्यवस्था में निहित है, जिसे बनाए रखने के लिए जनता और जनप्रतिनिधियों को मिलकर प्रयास करना चाहिए। उनके भाषण में सत्ता के खिलाफ विरोध के साथ-साथ लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का संदेश भी प्रमुख रूप से सामने आया। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल में हलचल देखी जा रही है।
जहां समर्थक इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की आवाज बता रहे हैं, वहीं विरोधी दल इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर व्यापक चर्चा जारी है और लोग विभिन्न दृष्टिकोणों से अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। रागिनी सोनकर का यह भाषण देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, लोकतांत्रिक व्यवस्था और सत्ता-विपक्ष के बीच जारी वैचारिक टकराव को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ले आया है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और बहस के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।









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