
नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (एनयूजे उत्तराखण्ड) ने राज्य में तेजी से बढ़ रहे तथाकथित न्यूज पोर्टलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यूनियन ने इन्हें अवैध वसूली, ब्लैकमेलिंग, साइबर अपराध और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का माध्यम बताया है। मुख्यमंत्री समेत शीर्ष अधिकारियों से कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।
- अवैध वसूली, ब्लैकमेलिंग और साइबर अपराध में लिप्त हैं कई पोर्टल
- बिना मानक और नियमों के चल रहे न्यूज पोर्टल समाज के लिए खतरा
- सरकारी विज्ञापन हासिल करने के लिए झूठे आंकड़ों से गुमराह करने का आरोप
- फर्जी पोर्टलों को ब्लैकलिस्ट और ब्लॉक करने की मांग
देहरादून। नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (एनयूजे उत्तराखण्ड) ने राज्य में कुकुरमुत्तों की तरह उग आए तथाकथित न्यूज पोर्टलों पर गंभीर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री, सूचना सचिव और महानिदेशक सूचना का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है। यूनियन का कहना है कि उत्तराखण्ड में कई न्यूज पोर्टल पत्रकारिता की गरिमा को ताक पर रखकर अब ‘अपराध का माध्यम’ बनते जा रहे हैं। एनयूजे की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया और न्यूज पोर्टलों की भूमिका जनहितकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार में अहम है, लेकिन न्यूज पोर्टलों के लिए ठोस मानक, नियमावली और प्रभावी नियंत्रण के अभाव में अनियंत्रित पोर्टलों की बाढ़ आ गई है।
इन तथाकथित पोर्टलों द्वारा सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी, कूटरचना, अवैध वसूली, ब्लैकमेलिंग, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और साइबर अपराध जैसे गैरकानूनी कृत्य किए जा रहे हैं। यूनियन के मार्गदर्शक वरिष्ठ पत्रकार त्रिलोक चन्द्र भट्ट ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और जिला सूचना अधिकारियों को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि कई पोर्टल बिना किसी ठोस प्रमाण के झूठे, मनगढ़ंत और काल्पनिक आरोप लगाकर सरकार, विभिन्न विभागों, अधिकारियों, प्रतिष्ठित व्यक्तियों और संस्थाओं का चरित्र हनन कर रहे हैं। इनका उद्देश्य निजी स्वार्थ के लिए वर्षों से बनी सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करना है।
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श्री भट्ट ने कहा कि भ्रामक और झूठी खबरें प्रकाशित कर समाज में नफरत फैलाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी तथ्य और मनगढ़ंत आंकड़े प्रस्तुत कर शासन को गुमराह किया जा रहा है, ताकि सरकारी विज्ञापन हासिल किए जा सकें, जो सीधे तौर पर राजकीय कोष के साथ धोखाधड़ी है। पत्र में यह भी कहा गया है कि पत्रकारिता की आड़ में विभिन्न संस्थाओं और व्यक्तियों पर दबाव बनाकर आर्थिक लाभ लेना और ब्लैकमेल करना इन पोर्टल संचालकों की कार्यशैली बन चुकी है। इंटरनेट के माध्यम से अवैध प्रचार और अफवाह फैलाने की ये गतिविधियां सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और भारतीय न्याय संहिता की मानहानि व जालसाजी से जुड़ी धाराओं के तहत गंभीर संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आती हैं।
एनयूजे उत्तराखण्ड ने मांग की है कि पत्रकारिता की सुचिता बनाए रखने के लिए न्यूज पोर्टलों के विभागीय पंजीकरण, सूचीबद्धता और संचालन हेतु कठोर मानक तय किए जाएं। साथ ही समाज में विद्वेष फैलाने और ब्लैकमेलिंग में लिप्त पोर्टलों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। यूनियन ने दागी और फर्जी न्यूज पोर्टलों को तत्काल ब्लैकलिस्ट व ब्लॉक करने, उनके सरकारी विज्ञापन रोकने तथा पूर्व में दिए गए विज्ञापनों की वसूली की भी मांग उठाई है। इसके साथ ही साइबर सेल के माध्यम से एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई और पीड़ितों की शिकायत सुनने के लिए एक अधिकार सम्पन्न राज्य स्तरीय तंत्र विकसित करने की भी मांग की गई है।







