
यह कविता कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता का संदेश देती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता, सही खान-पान, समय पर उपचार और नशे से दूरी को कैंसर से बचाव का प्रभावी माध्यम बताया गया है। जागरूकता और योग-व्यायाम को स्वस्थ जीवन की कुंजी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- कैंसर से बचाव का सबसे बड़ा हथियार
- जागरूकता से ही संभव है स्वस्थ जीवन
- कैंसर के लक्षण और सावधानी
- योग, संयम और जागरूकता का संदेश
गणपत लाल उदय
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पूरे विश्व में बढ़ रही है आज तीव्रता से यह बीमारी,
इम्यून सिस्टम कम कर देती कोशिकाओं में सारी।
बन जाती फिर कैंसर जैसी वही लाइलाज बीमारी,
इसलिए वक़्त से उपचार ले लेवे नर, चाहे हो नारी।।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाकर रखें, जो है हितकारी,
लापरवाही नहीं कोई बरतें, पड़ सकता है वो भारी।
अनगिनत कोशिकाएँ इसी शरीर में होती हैं हमारी,
खान-पान का ध्यान रखें सब, समझें ये ज़िम्मेदारी।।
200 से भी ज़्यादा तरह की होती कैंसर ये बीमारी,
इसलिए लक्षण समझ नहीं आते जल्दी से हमारी।
जैसे ब्लड कैंसर, फेफड़ों का कैंसर और ब्रेन कैंसर,
स्तन कैंसर, स्किन कैंसर की रखो सभी जानकारी।।
ऐसे कई लक्षण हैं कैंसर के, गाँठ बनना यह हमारी,
स्त्रियों के स्तन में गाँठ बनना भी है कैंसर बीमारी।
श्वास लेने में परेशानी, चाहे बलगम का हो दिक्कत,
भूख न लगना, बेहिसाब दर्द जोड़ों में रहना हमारी।।
नहीं गुटखा न खाना, तम्बाकू न बीड़ी और सिगरेट,
इस कैंसर के प्रति जागरूक होकर रहें सब निरोग।
है जागरूकता ही कैंसर का बचाव, न बढ़ने दे फेट,
कम खाकर रोज़ व्यायाम करना और करना योग।।
सैनिक की क़लम
गणपत लाल उदय
अजमेर, राजस्थान









