
डोईवाला और हर्रावाला के बीच नकरौंदा रेलवे फाटक पर बड़ी लापरवाही सामने आई, जहां ट्रेन गुजरने से ठीक पहले फाटक खोल दिया गया। लोको पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए समय रहते ट्रेन रोक दी, जिससे बड़ा हादसा टल गया। घटना के समय मौके पर 100 से अधिक वाहन और स्कूली बच्चे मौजूद थे।
- ट्रेन आने से पहले खोला गया फाटक, ट्रैक पार करने लगे वाहन
- 100 से अधिक वाहन और स्कूली बच्चे थे मौके पर मौजूद
- गेटमैन निलंबित, मैन्युअल सिग्नल सिस्टम पर उठे सवाल
- रेलवे ने दिए जांच के आदेश, मंडल में मची अफरा-तफरी
देहरादून। देहरादून जिले में रेलवे की एक बड़ी लापरवाही उस समय सामने आई, जब नकरौंदा रेलवे फाटक पर ट्रेन गुजरने से ठीक पहले फाटक खोल दिया गया। यदि लोको पायलट ने समय रहते सूझबूझ न दिखाई होती, तो यह घटना एक भयावह रेल हादसे में बदल सकती थी, जिसमें दर्जनों नहीं बल्कि सैकड़ों जानें खतरे में पड़ सकती थीं। घटना मंगलवार सुबह करीब 8:45 बजे की बताई जा रही है। दिल्ली से देहरादून आ रही मसूरी एक्सप्रेस डोईवाला स्टेशन पर दो मिनट के ठहराव के बाद आगे के लिए रवाना हुई थी।
ट्रेन को डोईवाला और हर्रावाला के बीच स्थित नकरौंदा रेलवे फाटक से गुजरना था। लोको पायलट को मैन्युअल प्रक्रिया के तहत फाटक बंद होने का ग्रीन सिग्नल मिल चुका था और ट्रेन निर्धारित गति से आगे बढ़ रही थी। इसी दौरान अचानक गेटमैन ने फाटक खोल दिया। फाटक खुलते ही दोनों ओर खड़े वाहन ट्रैक पार करने लगे। मौके पर 100 से अधिक वाहन मौजूद थे। यह समय स्कूल खुलने का था, जिस कारण बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी वहां खड़े थे। हालात बेहद संवेदनशील हो चुके थे।
लोको पायलट ने स्थिति को भांपते हुए तत्परता दिखाई और फाटक से कुछ दूरी पहले ही ट्रेन को रोक दिया। कुछ सेकंड की यह सूझबूझ न होती, तो ट्रेन सीधे ट्रैक पार कर रहे वाहनों और लोगों को अपनी चपेट में ले सकती थी। घटना के बाद रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया। प्राथमिक जांच में गेटमैन की गंभीर लापरवाही सामने आने पर उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। रेलवे अधिकारियों ने घटना की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं।
बताया गया कि इस फाटक पर अभी ऑटोमैटिक सिग्नल सिस्टम नहीं है और पूरा संचालन मैन्युअल व्यवस्था पर निर्भर है, जो इस तरह की घटनाओं को न्योता देता है। वहीं, रेलवे के इंजीनियरिंग संवर्ग के कर्मचारियों ने स्थानीय लोगों पर फाटक जबरन खुलवाने का आरोप भी लगाया है। कर्मचारियों के अनुसार, स्थानीय लोग फाटक देर से बंद रहने को लेकर अक्सर हंगामा करते हैं और दबाव बनाते हैं, जिससे कर्मचारियों पर मानसिक दबाव पड़ता है।
रेलवे के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक आदित्य गुप्ता ने कहा कि इस तरह की लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लोगों की जान से जुड़ा मामला है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना न सिर्फ एक लोको पायलट की जिम्मेदारी और सतर्कता को उजागर करती है, बल्कि रेलवे फाटकों पर मैन्युअल सिस्टम और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। अगर समय रहते सुधार नहीं हुए, तो अगली बार इतनी बड़ी किस्मत शायद साथ न दे।





