
नवा रायपुर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 17वीं बैठक में उत्तराखण्ड ने विकास से जुड़े 13 महत्वपूर्ण विषय प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किए। केंद्र सरकार ने राज्य द्वारा रखे गए बिंदुओं पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया। बैठक में क्षेत्रीय सहयोग, नीति समन्वय और विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई।
- नवा रायपुर में चार राज्यों और केंद्र के बीच हुई अहम चर्चा
- उत्तराखण्ड की बेस्ट प्रैक्टिसेस को मिला विशेष सराहना
- लंबित 11 बिंदुओं की प्रगति की हुई समीक्षा
- बैठक से योजनाओं के क्रियान्वयन को मिलेगी गति : मुख्यमंत्री
देहरादून। छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 17वीं बैठक में उत्तराखण्ड राज्य ने विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को मजबूती के साथ प्रस्तुत करते हुए प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई। बैठक में उत्तराखण्ड द्वारा कुल 13 बिंदु प्रस्तुत किए गए, जो परिषद में शामिल अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक रहे। राज्य द्वारा रखे गए विषयों पर केंद्र सरकार ने सकारात्मक रुख व्यक्त करते हुए आवश्यक कार्यवाही का भरोसा दिलाया। यह बैठक उत्तराखण्ड राज्य के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इसमें राज्य के सामाजिक, आर्थिक, प्रशासनिक और आधारभूत ढांचे से जुड़े विषयों को केंद्र स्तर पर प्रभावी ढंग से रखा गया।
प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री तथा वन एवं पर्यावरण आर.के. सुधांशु की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में प्रतिभाग किया। परिषद की बैठक में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उत्तराखण्ड और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक के दौरान चारों राज्यों के सामाजिक-आर्थिक विकास, योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, लंबित मामलों के समाधान तथा आपसी समन्वय को मजबूत करने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु ने बताया कि उत्तराखण्ड की ओर से सभी विषय ठोस तर्कों और व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ रखे गए, जिस पर भारत सरकार द्वारा सकारात्मक प्रतिक्रिया दी गई।
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उन्होंने बताया कि पूर्व में वाराणसी में आयोजित परिषद की बैठक में उठाए गए 11 महत्वपूर्ण बिंदुओं को पुनःसमीक्षा हेतु यथावत रखा गया था। इस बैठक में इन बिंदुओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इनमें खाद्य सुरक्षा उपाय, महिलाओं एवं बच्चों के यौन शोषण तथा पॉक्सो प्रकरणों पर कार्यवाही, फास्ट ट्रैक कोर्ट, कुपोषण की रोकथाम, ईआरएसएस-112, सहकारिता को सशक्त बनाने के उपाय, आयुष्मान भारत योजना तथा सभी गांवों के समीप बैंक शाखाओं और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की स्थापना जैसे विषय शामिल रहे। बैठक में राज्यों द्वारा अपनाई जा रही नवाचारपूर्ण पहलों और बेस्ट प्रैक्टिसेस पर भी चर्चा हुई।
उत्तराखण्ड की ओर से राज्य-से-निवेश आपूर्ति श्रृंखला योजना, डिजिटल शिक्षा प्रबंधन प्रणाली (DEMS) तथा सारा योजना के अंतर्गत जल स्रोतों के संवर्द्धन और संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्रस्तुत किया गया, जिन्हें विशेष सराहना मिली। अन्य राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ द्वारा भी अपने-अपने प्रस्तुतीकरण दिए गए। इस बैठक में राज्य से प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण आर.के. सुधांशु, सचिव बीवीआरसी पुरुषोत्तम, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन, सचिव सामान्य प्रशासन राजेंद्र कुमार, विशेष सचिव गृह निवेदिता कुकरेती तथा विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की बैठक राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करने और क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने का प्रभावी मंच है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड ने इस बैठक में विकास, आधारभूत संरचना, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और जनहित से जुड़े विषयों को प्राथमिकता के साथ रखा है। परिषद से प्राप्त सहमति और सुझावों के आधार पर राज्य में योजनाओं के क्रियान्वयन को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन द्वारा परिषद की बैठक से पूर्व सभी विभागों के साथ पृथक-पृथक बैठक कर बिंदुओं पर गहन चर्चा की गई और प्रस्ताव तैयार कराए गए। पहली बार उत्तराखण्ड द्वारा अधिकतम 13 विषय प्रस्तुत किए गए, जबकि अन्य राज्यों द्वारा अपेक्षाकृत कम विषय रखे गए। उत्तराखण्ड ने मेडिकल कॉलेज स्थापना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, गोवंश संरक्षण, आपदा से क्षतिग्रस्त संरचनाओं के पुनर्स्थापन, रेल और आरआरटीएस विस्तार, आंगनबाड़ी मानदेय, आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास तथा वन कानूनों से जुड़े विषय प्रमुखता से उठाए।
बैठक में केंद्र सरकार द्वारा ई-गवर्नेंस, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, रेल, खनन, मत्स्य पालन, जल जीवन मिशन सहित विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े विषयों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। यह बैठक परिषद की मुख्य बैठक से पूर्व एजेंडा तय करने का महत्वपूर्ण मंच मानी जाती है, जिससे आगामी निर्णयों और विकास योजनाओं को दिशा मिलती है।






