
यह कविता नन्हे बच्चों के माध्यम से देशप्रेम, साहस और आत्मविश्वास की भावना को उजागर करती है। छोटे कद-काठी के बावजूद बड़े सपनों और राष्ट्र के प्रति समर्पण को सरल, बाल-सुलभ भाषा में प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
- छोटे कदम, बड़ा हौसला
- नन्हे सैनिकों का देशप्रेम
- बचपन की वर्दी, सपनों की सीमा
- दम है हममें, देश है दिल में
सैनिक की कलम
गणपत लाल उदय, अजमेर, राजस्थान
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नन्हें-नन्हें सैनिक हैं हम, नहीं किसी से कम,
चाहें हमको आज़मालो, हममें भरा है दम।
छोटे-छोटे पाँव हमारे एवं छोटे-छोटे हाथ,
छोटी-सी यह वर्दी हमारी, रहती सदा साथ।
नन्हें-नन्हें सैनिक हैं हम, नहीं किसी से कम,
चाहें हमको आज़मालो, हममें भरा है दम।
छोटे-छोटे जूते हमारे, छोटा-सा है यह बेल्ट,
छोटी-सी है टोपी हमारी, छोटा-सा यह शर्ट।
नन्हें-नन्हें सैनिक हैं हम, नहीं किसी से कम,
चाहें हमको आज़मालो, हममें भरा है दम।
छोटे-छोटे सपने हैं, पर लक्ष्य बहुत ही बड़ा,
हाथ में गन लेकर रहता हूँ, सीमा पर खड़ा।
नन्हें-नन्हें सैनिक हैं हम, नहीं किसी से कम,
चाहें हमको आज़मालो, हममें भरा है दम।
छोटे-छोटे कान हमारे एवं छोटे-छोटे नेत्र,
यहाँ अनेकों सैनिक भाई, हमारे प्यारे मित्र।
नन्हें-नन्हें सैनिक हैं हम, नहीं किसी से कम,
चाहें हमको आज़मालो, हममें भरा है दम।
छोटे-छोटे नयन हमारे और छोटा-सा बदन,
सारा हिंदुस्तान है यह, हमारा प्यारा सदन।









