
यह कविता वंदे मातरम को राष्ट्र की सामूहिक चेतना, स्वतंत्रता संग्राम और सांस्कृतिक एकता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करता है। 150 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा को समेटते हुए यह रचना मातृभूमि के प्रति समर्पण, शौर्य और सतत प्रगति के भाव को उद्घोषित करती है। वंदे मातरम को भारत की आन-बान-शान का शाश्वत गीत बताया गया है।
- वंदे मातरम : 150 वर्षों की राष्ट्रगाथा
- वंदे मातरम : एकता, चेतना और स्वाभिमान का स्वर
- वंदे मातरम : स्वतंत्र भारत की आत्मा का गीत
- वंदे मातरम : इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का संगम
डॉ. रीना रवि मालपानी
कवयित्री एवं लेखिका
Government Advertisement...
150 वर्ष की यात्रा का मधुर संगीत है वंदे मातरम।
भारत को एकता के सूत्र में बांधने वाला उद्घोष है वंदे मातरम।
सामूहिक चेतना का अनुपम वक्तव्य है वंदे मातरम।
देशभक्ति के जोश का उत्कर्ष है वंदे मातरम।
क्रांतिकारियों के बलिदान की आवाज है वंदे मातरम।
स्वतंत्रता संग्राम के नारे का उन्मुक्त रूप है वंदे मातरम।
मातृभूमि की भव्यता का साक्षात्कार है वंदे मातरम।
भारतीय संस्कृति की भावनात्मक दृढ़ता है वंदे मातरम।
अनेकता में एकता का अप्रतिम स्वर है वंदे मातरम।
नवीन ऊर्जा एवं अनुभूति का समन्वय है वंदे मातरम।
माँ भारती को समर्पित राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है वंदे मातरम।
आत्मविश्वास के भाव से परिपूरित है वंदे मातरम।
इतिहास की स्मृति का जीवंत रूप है वंदे मातरम।
संकल्प के प्रति पूर्णनिष्ठा प्रदर्शित करता है वंदे मातरम।
विश्व के परिवर्तित भूगोल का साक्ष्य है वंदे मातरम।
भारत के स्वतंत्र अस्तित्व का शंखनाद है वंदे मातरम।
भारत के उन्नत स्वरूप का परिचायक है वंदे मातरम।
स्वर्णिम, अरुणिम भारत का हर्ष है वंदे मातरम।
देशप्रेम की अविरल शौर्य गंगा-यमुना है वंदे मातरम।
शांति, सौहद्र और सतत प्रगति का आह्वान है वंदे मातरम।
हर भारतवासी के दिल में गूँजता एक शाश्वत गीत है वंदे मातरम।
डॉ. रीना कहती, भारत की आन-बान और शान की स्तुति वंदन है वंदे मातरम।






