
बांदा जिले के पन्ना टाइगर रिजर्व बफर जोन में बाघ ने 11 वर्षीय बालक को खेत में मार डाला। बाघ बच्चे के शरीर का ऊपरी हिस्सा खा गया, जबकि निचला हिस्सा और खून से सने कपड़े बरामद हुए। घटना के बाद क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल है, वन विभाग जांच में जुटा है।
- खेत में झोपड़ी से झोपड़ी जाते समय बाघ ने किया हमला
- घटनास्थल पर मिले पगमार्क, आधा शव और खून से सने कपड़े
- बफर जोन में बाघ के हमले की दूसरी घटना, वन विभाग अलर्ट
- ग्रामीणों में आक्रोश, बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
बांदा। जिले में पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर जोन से सटे गांवों में एक बार फिर बाघ का आतंक सामने आया है। शुक्रवार सुबह ग्राम जरदोबा में एक दिल दहला देने वाली घटना में बाघ ने 11 वर्षीय बालक को अपना शिकार बना लिया। यह हादसा उस समय हुआ जब बच्चा खेत में बनी एक झोपड़ी से दूसरी झोपड़ी में आटा लेकर जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 5:30 बजे ग्राम जरदोबा के तलैया के पास महेंद्र पटेल के खेत में सरसों की फसल के बीच छिपे बाघ ने अचानक हमला किया। बालक देव गौड़, अपने पिता बहादुर गौड़ के साथ खेत में रह रहा था।
जैसे ही वह झोपड़ी से बाहर निकला, बाघ ने उसे दबोच लिया और कुछ ही पलों में झाड़ियों की ओर खींच ले गया। घटना के बाद खेत में मौजूद चरवाहों और ग्रामीणों ने जब शोर मचाया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मौके पर पहुंचे लोगों को बालक के पैर और शरीर का निचला हिस्सा ही मिला, जबकि सिर, सीना, गर्दन और कमर का हिस्सा गायब था। घटनास्थल से बाघ के पगमार्क, खून से सने कपड़े और शरीर के अवशेष बरामद हुए। सूचना मिलने पर पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारी और वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची।
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एरिया रेंज अधिकारी अजीत जाट ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि बाघ ने बच्चे के शरीर का अधिकांश हिस्सा खा लिया है और केवल निचला हिस्सा छोड़कर जंगल की ओर भाग गया। मामले की जांच की जा रही है और क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। यह घटना पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर जोन में बाघ द्वारा मानव पर हमले की दूसरी घटना बताई जा रही है। इससे पहले इसी क्षेत्र में एक महिला को भी बाघ अपना शिकार बना चुका है। जरदोबा गांव चारों ओर से जंगल से घिरा हुआ है और मुख्य सड़क से लगभग 10 किलोमीटर अंदर स्थित है, जिससे जंगली जानवरों की आवाजाही बनी रहती है।
घटना के बाद गांव में भारी दहशत और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ की मौजूदगी के बावजूद सफारी और मानवीय गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिससे खतरा बढ़ रहा है। लोग अब अपने बच्चों और परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और वन विभाग से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। वन विभाग ने क्षेत्र में अतिरिक्त गश्त, निगरानी कैमरे और अलर्ट जारी करने की बात कही है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बाघ की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होगा, तब तक भय का माहौल बना रहेगा।








