
उत्तराखंड में दायित्वधारियों की पांचवीं सूची जल्द जारी होने की संभावना है। इसे लेकर गोपन विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों से रिक्त पदों का विवरण मांगा है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कैबिनेट विस्तार और नए दायित्वों को लेकर भाजपा नेताओं में उत्साह का माहौल है।
- गोपन विभाग ने सभी विभागों से मांगी खाली पदों की जानकारी
- दायित्व और कैबिनेट एंट्री को लेकर विधायकों की धड़कनें तेज
- भाजपा हाईकमान की अंतिम स्वीकृति का इंतजार
- अब तक चार सूचियों में 59 नेताओं को मिल चुका है दायित्व
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। प्रदेश में दायित्वधारियों की पांचवीं सूची जल्द जारी होने की संभावना जताई जा रही है। इसे लेकर शासन और संगठन स्तर पर अंदरखाने तैयारियां तेज कर दी गई हैं। गोपन विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों से उन पदों का ब्योरा मांगा है, जो वर्तमान में खाली पड़े हैं। माना जा रहा है कि इन पदों पर शीघ्र नियुक्तियां की जा सकती हैं।
प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा संगठन दायित्व वितरण और संभावित कैबिनेट विस्तार के जरिए राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में दायित्वधारियों की नई सूची और मंत्रिमंडल में संभावित नई एंट्री को लेकर पार्टी नेताओं और विधायकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
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विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की निगाहें सूची पर
कई विधायक लंबे समय से मंत्रिमंडल में शामिल होने की आस लगाए बैठे हैं, जबकि संगठन से जुड़े वरिष्ठ नेता विभिन्न विभागों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या सदस्य के रूप में दायित्व मिलने का इंतजार कर रहे हैं। भाजपा के आला नेताओं का भी मानना है कि अधिकांश नाम तय हो चुके हैं और अब केवल अंतिम स्वीकृति का इंतजार है।
अब तक चार सूचियां हो चुकी हैं जारी
गौरतलब है कि प्रदेश में दायित्वधारियों की पहली सूची 27 सितंबर 2023 को जारी की गई थी, जिसमें 10 नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद 14 दिसंबर 2023 को दूसरी सूची में 11 नेताओं को दायित्व मिला। 1 अप्रैल 2024 को जारी तीसरी सूची में 20 नेताओं के नाम शामिल किए गए, जबकि 4 अप्रैल 2024 को जारी चौथी सूची में 18 नेताओं को दायित्व सौंपा गया। इन चार सूचियों में अब तक कुल 59 नेताओं को विभिन्न दायित्व दिए जा चुके हैं।
अब पांचवीं सूची को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि इसमें नए चेहरों के साथ-साथ संगठनात्मक संतुलन को भी ध्यान में रखा जाएगा। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, दायित्व वितरण के जरिए भाजपा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और असंतोष को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में सूची जारी होते ही प्रदेश की राजनीति में और भी हलचल देखने को मिल सकती है।





