
एमसीएक्स पर चांदी के दाम तीन लाख रुपये प्रति किलो पहुंचने से आगरा का सराफा कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। तेजी के चलते बिक्री ठप है, उधारी का भुगतान अटका है और कारीगरों का काम रुक गया है, जिससे पूरा बाजार संकट में है।
- ऑल टाइम हाई पर चांदी, कारीगरों का काम रुका
- सहालग में भी नहीं लौटी रौनक
- हल्की पायल की ओर झुका बाजार
- उधारी का कारोबार बना सबसे बड़ा संकट
नई दिल्ली। चांदी की मंडी के नाम से मशहूर आगरा में सराफा कारोबार इन दिनों गहरे संकट से गुजर रहा है। सोमवार को एमसीएक्स पर चांदी तीन लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई, जिससे यह ऑल टाइम हाई पर आ गई है। कीमतों में आई इस तेज़ उछाल ने जहां निवेशकों को चौंकाया है, वहीं सराफा कारोबारियों के लिए यह भारी परेशानी बन गई है।
शहर में करीब 2500 से अधिक सराफा कारोबारी सक्रिय हैं और हर महीने लगभग 50 टन चांदी का कारोबार होता है। इस कारोबार से एक लाख से अधिक कारीगर जुड़े हुए हैं। आगरा में कुटीर उद्योग की तरह घर-घर पायल बनाई जाती हैं, लेकिन अब चांदी की बढ़ती कीमतों के कारण बाजार में सन्नाटा पसरा हुआ है।
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उधारी का भुगतान बना सबसे बड़ा संकट
सराफा कारोबार का बड़ा हिस्सा उधारी पर चलता रहा है। कारोबारी कारीगरों को 20–30 किलो चांदी पायल और आभूषण बनाने के लिए देते थे, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि वही चांदी कारीगरों से वापस ली जा रही है। तेजी के कारण माल बिक नहीं पा रहा, जिससे करोड़ों रुपये का भुगतान अधर में लटक गया है।
सहालग में भी नहीं लौटी रौनक
एक ओर चांदी के दाम आसमान पर हैं, दूसरी ओर सहालग का मौसम चल रहा है। दोहरी मार से जूझ रहे कारोबारी अब हल्के आभूषण बनाने को मजबूर हैं। पहले जहां 100 से 200 ग्राम की पायलें बिकती थीं, अब 30 से 50 ग्राम की पायल की ही मांग रह गई है। कारोबारियों का कहना है कि तेजी का असर आभूषणों की शुद्धता और गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है।
बंद पड़े कारखाने, कारीगर बेरोजगार
सराफा स्वर्णकार व्यावसायिक कमेटी के संरक्षक राजू मेहरा ने बताया कि पायल बनाने के कई कारखाने बंद पड़े हैं। उधारी का भुगतान न मिलने से कारोबारी कच्चा माल देने से भी कतरा रहे हैं। फिलहाल चांदी की कीमतों में किसी राहत की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
बाजार में पसरा सन्नाटा
श्री सराफा कमेटी के महामंत्री देवेंद्र गोयल के अनुसार किनारी बाजार, चौबे जी का फाटक जैसे प्रमुख बाजारों में सन्नाटा छाया हुआ है। सहालग के बावजूद बुकिंग बंद है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो कारोबार के पूरी तरह चौपट होने का खतरा है।
आम आदमी पर बढ़ा बोझ
आगरा सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष नितेश अग्रवाल ने कहा कि चांदी की कीमतों में भारी वृद्धि से आम आदमी सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। चांदी को कभी गरीबों का सोना कहा जाता था, लेकिन अब यह आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही है। कारोबारियों को भी माल और भविष्य की चिंता सताने लगी है।








