
नंदा राजजात 2026 को स्थगित करने के फैसले के विरोध में 484 गांवों की महापंचायत हुई। महापंचायत ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि नंदा की बड़ी राजजात इसी वर्ष भव्य रूप से आयोजित की जाएगी।
- नंदानगर में हुई ऐतिहासिक महापंचायत, सर्वसम्मति से निर्णय
- मां नंदा देवी सिद्धपीठ कुरुड़ आयोजन समिति का गठन
- वसंत पंचमी पर निकलेगा नंदा राजजात का मुहूर्त
- श्रीनंदा राजजात समिति नौटी के फैसले को किया खारिज
चमोली। उत्तराखंड की आस्था और परंपरा से जुड़ी श्रीनंदा देवी राजजात को लेकर खड़े हुए विवाद के बीच नंदानगर ब्लॉक सभागार में 484 गांवों की ऐतिहासिक महापंचायत आयोजित की गई। महापंचायत में सर्वसम्मति से यह बड़ा फैसला लिया गया कि नंदा की बड़ी राजजात वर्ष 2026 में ही आयोजित की जाएगी, चाहे इसके लिए अलग आयोजन समिति क्यों न बनानी पड़े। महापंचायत में मां नंदा धाम कुरुड़ को पर्यटन मानचित्र पर उच्च स्थान दिलाने और नंदा राजजात की परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखने पर जोर दिया गया।
इस अवसर पर मां नंदा देवी सिद्धपीठ मंदिर कुरुड़ आयोजन समिति का गठन किया गया। कर्नल (सेवानिवृत्त) हरेंद्र सिंह रावत को सर्वसम्मति से समिति का अध्यक्ष चुना गया। निर्णय लिया गया कि आगामी 23 जनवरी, वसंत पंचमी के अवसर पर नंदा राजजात का विधिवत मुहूर्त निकाला जाएगा और यात्रा को भव्य, पारंपरिक स्वरूप में संचालित किया जाएगा। महापंचायत में मौजूद ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने एक स्वर में कहा कि राजजात केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि पहाड़ की सांस्कृतिक पहचान है, जिसे किसी भी कीमत पर टाला नहीं जा सकता।
Government Advertisement...
गौरतलब है कि एक दिन पहले श्रीनंदा राजजात समिति नौटी ने 2026 की यात्रा को स्थगित करने का निर्णय लिया था, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में असंतोष फैल गया था। समिति ने मलमास, बुग्यालों में बर्फ, ढांचागत सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक पुनर्विचार पत्र को स्थगन का कारण बताया था। समिति के अनुसार मलमास के कारण होमकुंड में पूजा की तिथि सितंबर के अंत में पड़ रही थी, जिससे यात्रा के अंतिम चरण में कठिनाइयां बढ़ सकती थीं। इसी आधार पर यात्रा को आगे टालने का निर्णय लिया गया था।
हालांकि, महापंचायत में इस फैसले को नकारते हुए कहा गया कि नंदा राजजात आस्था का विषय है, और इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते पूरी की जा सकती हैं। अब वसंत पंचमी के दिन यात्रा की तिथि और विस्तृत कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। महापंचायत के इस फैसले के बाद नंदा राजजात 2026 को लेकर नया अध्याय शुरू हो गया है और आने वाले दिनों में प्रशासन व विभिन्न समितियों के बीच समन्वय की चुनौती भी बढ़ गई है।





