
अल्मोड़ा जिला उपभोक्ता आयोग ने समय पर ₹313 के जूते डिलीवर न करने पर ऑनलाइन कंपनी पर ₹40,000 का जुर्माना लगाया है। आयोग ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार करार दिया।
- नोटिस की अनदेखी करना पड़ा भारी
- उपभोक्ता आयोग ने माना अनुचित व्यापार व्यवहार
- मानसिक पीड़ा के लिए भी मिला मुआवजा
- ऑनलाइन कंपनियों के लिए चेतावनी वाला फैसला
अल्मोड़ा। ऑनलाइन खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं के लिए यह फैसला मील का पत्थर साबित हो सकता है। अल्मोड़ा जिला उपभोक्ता आयोग ने एक अहम निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि समय पर सामान की डिलीवरी न करना और उपभोक्ता आयोग के नोटिस की अनदेखी करना अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है। मामला अल्मोड़ा निवासी कोमल जोशी से जुड़ा है, जिन्होंने करीब आठ माह पहले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म मीशो के माध्यम से रविंद्र इंडस्ट्रीज से ₹313 में लेडीज जूते खरीदे थे। भुगतान होने के बावजूद निर्धारित समय सीमा में जूते की डिलीवरी नहीं की गई।
शिकायतकर्ता ने कई बार कंपनी से संपर्क किया, लेकिन न तो जूते मिले और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया गया। मजबूर होकर उपभोक्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया कि विपक्षी कंपनियों को कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन उन्होंने जानबूझकर उन्हें स्वीकार नहीं किया। इसे सेवा में गंभीर कमी और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन मानते हुए आयोग ने एकतरफा कार्रवाई की। आयोग के अध्यक्ष रमेश कुमार जायसवाल और सदस्य सुरेश चंद्र कांडपाल ने आदेश दिया कि विपक्षी कंपनी शिकायतकर्ता को ₹313 की मूल राशि 21 मई 2025 से 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाए।
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इसके अलावा, मानसिक पीड़ा के लिए ₹10,000 का मुआवजा, वाद-व्यय के रूप में ₹5,000 तथा अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए ₹25,000 का अर्थदंड लगाया गया है। यह जुर्माना उपभोक्ता हित संरक्षण कोष में जमा कराया जाएगा। कुल मिलाकर कंपनी को लगभग ₹40,000 का भुगतान करना होगा। उपभोक्ता आयोग का यह फैसला ऑनलाइन कंपनियों के लिए सख्त संदेश है कि उपभोक्ता अधिकारों की अनदेखी अब भारी पड़ सकती है। वहीं, उपभोक्ताओं के लिए यह निर्णय न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत करता है।





