
देहरादून में इलेक्ट्रिक बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (ई-बीआरटीएस) लागू करने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है। फोरलेन डेडीकेटेड कॉरिडोर से शहर को ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
- राजधानी देहरादून को मिलेगी मेट्रो जैसी सुविधा, लागत होगी कम
- ई-बीआरटीएस के लिए डेडीकेटेड एलीवेटेड कॉरिडोर को हरी झंडी
- दो लेन ई-बसों और दो लेन सामान्य बसों के लिए होंगी आरक्षित
- ग्रीन ट्रांसपोर्ट मॉडल की ओर बढ़ेगा देहरादून
देहरादून। राज्य की राजधानी देहरादून अब आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की ओर तेज़ी से कदम बढ़ा रही है। उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की बैठक में शहर में ई-बीआरटीएस (इलेक्ट्रिक बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) लागू करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है। सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में ई-बीआरटीएस के लिए प्रस्तावित डेडीकेटेड एलीवेटेड कॉरिडोर को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए टू लेन के बजाय फोर लेन बनाए जाने के निर्देश दिए गए। योजना के अनुसार, दो लेन केवल इलेक्ट्रिक बसों के लिए आरक्षित होंगी, जबकि शेष दो लेनों में सामान्य बसों का संचालन किया जाएगा। इससे सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ निजी वाहनों पर निर्भरता भी कम होगी। ई-बीआरटीएस की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें पूरी तरह इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा।
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इससे न केवल वायु और ध्वनि प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि ईंधन लागत भी घटेगी। डेडीकेटेड लेन होने के कारण बसें बिना रुकावट तेज़ी से चल सकेंगी, जिससे यात्रियों का समय बचेगा और सेवा अधिक भरोसेमंद बनेगी। बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि परियोजना के अंतर्गत पार्किंग व्यवस्था की समुचित और विस्तृत योजना तैयार की जाए। इसके साथ ही बिंदाल और रिस्पना एलीवेटेड रोड के अलाइनमेंट को ई-बीआरटीएस कॉरिडोर से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया, ताकि जंक्शनों पर तकनीकी समस्याएं न आएं और यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन और बेहतर समन्वय के लिए लोक निर्माण विभाग, देहरादून के अधीक्षण अभियंता को नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन और पीडब्ल्यूडी के बीच तालमेल मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ई-बीआरटीएस परियोजना देहरादून को कम लागत में मेट्रो जैसी सुविधा प्रदान करेगी और शहर को ग्रीन ट्रांसपोर्ट मॉडल की दिशा में आगे ले जाएगी।
यह परियोजना न केवल यातायात समस्या का समाधान बनेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी एक मील का पत्थर साबित होगी। बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पांडेय, बृजेश कुमार संत, अपर सचिव विनीत कुमार और यूकेएमआरसी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।





