
महाराष्ट्र के सतारा जिले में भारतीय सेना के जवान प्रमोद जाधव की सड़क हादसे में मौत हो गई। दुखद संयोग यह रहा कि उनकी बेटी का जन्म पिता के निधन के महज 8 घंटे बाद हुआ। पत्नी नवजात को साथ लेकर पति की अंतिम विदाई देने श्मशान घाट पहुँची।
- पैटर्निटी लीव पर आए फौजी की सड़क हादसे में मौत, 8 घंटे बाद जन्मी बेटी
- एक ओर किलकारी, दूसरी ओर शोक: नवजात के साथ पति की अर्थी तक पहुँची पत्नी
- नियति की विडंबना: बेटी ने ली पहली सांस, फौजी पिता ने छोड़ी आखिरी
- सेना के जवान प्रमोद जाधव को पूरे सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
सतारा (महाराष्ट्र)। महाराष्ट्र के सतारा जिले से सामने आई एक हृदयविदारक घटना ने पूरे देश को भावुक कर दिया है। भारतीय सेना में कार्यरत जवान प्रमोद जाधव अपनी पत्नी की डिलीवरी के लिए पैटर्निटी लीव लेकर घर आए थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। बेटी के जन्म से महज आठ घंटे पहले एक सड़क हादसे में उन्होंने अपनी जान गंवा दी।
सतारा तालुका के दरे (Dare) गांव निवासी प्रमोद जाधव भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे थे। पत्नी की डिलीवरी नजदीक होने के कारण वे बेहद उत्साहित थे और छुट्टी लेकर परिवार के साथ समय बिता रहे थे। सोमवार को किसी निजी कार्य से बाइक पर निकले प्रमोद एक भीषण सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए। गंभीर रूप से घायल प्रमोद को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
दुखद संयोग यह रहा कि प्रमोद के निधन के कुछ ही घंटों बाद उनकी पत्नी ने एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया। जिस घर में नई जिंदगी के स्वागत की तैयारी थी, वहां मातम पसर गया। एक तरफ किलकारी गूंजी, तो दूसरी ओर वीर जवान की शहादत का शोक छा गया।
In Satara, Maharashtra, Pramod Jadhav was given a final farewell wrapped in the Tricolour.
His wife and their daughter, born just eight hours earlier, stood beside him.
His family bid him a final goodbye 😢 pic.twitter.com/E3iF9Rgfmy
— News Algebra (@NewsAlgebraIND) January 11, 2026
इस घटना का सबसे मार्मिक दृश्य उस समय सामने आया जब प्रमोद जाधव की पत्नी, जो अभी प्रसव और सर्जरी से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थीं, अस्पताल से सीधे स्ट्रेचर पर श्मशान घाट लाई गईं। उन्होंने अपनी महज 8 घंटे की नवजात बेटी को साथ लेकर पति को अंतिम विदाई दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
प्रमोद जाधव का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और स्थानीय प्रशासन व ग्रामीणों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। पूरा दरे गांव “वीर जवान अमर रहे” के नारों से गूंज उठा।
यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि उस बलिदान की भी याद दिलाती है, जो हमारे सैनिक और उनके परिवार हर दिन देश के लिए सहते हैं। एक बेटी ने दुनिया में कदम रखा, लेकिन अपने पिता को देखने से पहले ही उन्हें खो दिया—यह नियति का ऐसा प्रहार है, जिसे शब्दों में बयान करना कठिन है।








