
ज्वालापुर के पूर्व विधायक सुरेश राठौर ने देहरादून और हरिद्वार में दर्ज दो मुकदमों में गिरफ्तारी से बचने के लिए उत्तराखंड हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। हाई कोर्ट ने दोनों मामलों में पुलिस से विस्तृत जानकारी मांगी है।
- अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े मामलों में बढ़ी पूर्व विधायक की मुश्किलें
- हाई कोर्ट ने हरिद्वार और देहरादून पुलिस से मांगी रिपोर्ट
- नोटिस पर नोटिस, फिर भी पुलिस के सामने पेश नहीं हुए राठौर
- अभिनेत्री उर्मिला सनावर भी हाई कोर्ट जाने की तैयारी में
हरिद्वार। अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी प्रकरण में नाम सामने आने के बाद ज्वालापुर के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। देहरादून और हरिद्वार में उनके खिलाफ दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज होने और पुलिस द्वारा लगातार नोटिस जारी किए जाने के बाद, अब उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए उत्तराखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
पूर्व विधायक की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत से जुड़े प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने हरिद्वार और देहरादून पुलिस से दोनों मामलों की विस्तृत जानकारी मांगी है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से आरोपों, धाराओं और अब तक की जांच स्थिति पर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। यह पूरा मामला तब तूल पकड़ गया जब अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर पूर्व विधायक की कथित पत्नी व अभिनेत्री उर्मिला सनावर से बातचीत का एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसके बाद राठौर और उर्मिला सनावर दोनों ही जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए।
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इस प्रकरण में
- देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाने में भाजपा की पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया है।
- वहीं हरिद्वार के बहादराबाद थाने में गुरु रविदास विश्व महापीठ के अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार की शिकायत पर मामला दर्ज है।
दोनों मामलों में पुलिस की ओर से पूछताछ के लिए बार-बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन अब तक सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर पुलिस के सामने पेश नहीं हुए। सूत्रों के अनुसार, दोनों ही फिलहाल संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। हाई कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वे दोनों मुकदमों से संबंधित आरोपों, कानूनी धाराओं और साक्ष्यों की पूरी जानकारी अदालत में प्रस्तुत करें। माना जा रहा है कि पुलिस के काउंटर दाखिल होने के बाद ही याचिका पर अगली सुनवाई होगी।
हालांकि अभी तक सुरेश राठौर के खिलाफ कोई गैर-जमानती वारंट जारी नहीं हुआ है, लेकिन कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलती, तो उनकी गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। समर्थकों का दावा है कि हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद राठौर पुलिस के सामने पेश होकर जांच में सहयोग करेंगे। यह मामला न केवल राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, बल्कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर रहा है।





