
भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की 101वीं जयंती के अवसर पर पटना में आयोजित समारोह में देशभर के 21 साहित्यकारों, लेखकों और पत्रकारों को ‘अजातशत्रु अटल सम्मान’ से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में अटल जी के राष्ट्र, साहित्य और लोकतंत्र के प्रति योगदान को भावपूर्ण स्मरण किया गया।
- अंतर्राष्ट्रीय सखी साहित्य परिवार बिहार इकाई का गरिमामय आयोजन
- साहित्य, पत्रकारिता और सामाजिक योगदान को मिला राष्ट्रीय सम्मान
- अटल जी के विचार और व्यक्तित्व को समर्पित रहा सम्मान समारोह
- देशभर के नामचीन साहित्यकारों और लेखकों की सहभागिता
पटना (बिहार)। अखिल भारतीय साहित्यिक संस्थान अंतर्राष्ट्रीय सखी साहित्य परिवार (रजि.), बिहार इकाई द्वारा भारत रत्न, कवि, पत्रकार, पूर्व प्रधानमंत्री एवं ‘अजातशत्रु’ के नाम से विख्यात माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की 101वीं जयंती के पावन अवसर पर एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से चयनित 21 प्रतिष्ठित साहित्यकारों, लेखकों और पत्रकारों को “अजातशत्रु अटल सम्मान” से अलंकृत किया गया।
कार्यक्रम में संस्था की संस्थापिका डॉ. दीपिका सुतोदिया तथा बिहार इकाई के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संचालक रूपेश कुमार ने समाज, साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर योगदान देने वाले रचनाकारों को सम्मानित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि यह सम्मान अटल बिहारी वाजपेयी जी के उदार व्यक्तित्व, लोकतांत्रिक मूल्यों और साहित्यिक चेतना को समर्पित है, जो आज भी देश को प्रेरणा देता है।
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सम्मान प्राप्त करने वालों में मुंबई से साहित्यकार सुरंगमा और अनामिका दूबे ‘निधि’, राजस्थान से माया सैनी और ममता लडिवाल, मथुरा से डॉ. संध्या चतुर्वेदी, वाराणसी से वर्तिका अग्रवाल ‘वरदा’, सुल्तानपुर से डॉ. सरला सिंह ‘स्निग्धा’, हरियाणा से बीजेंद्र जैमिनी, मधुबनी से शारदा झा और डॉ. मीनाक्षी कुमारी, अनूपपुर से सरिता श्रीवास्तव, लखनऊ से प्रिया सिंह और डॉ. रीमा सिन्हा, फरीदाबाद से लिटरेरी जनरल सरिता कुमार, आगरा से डॉ. विजय लक्ष्मी ‘अनु’, ग्वालियर से प्रतिभा दुबे, रायबरेली से शिव कुमार ‘आकाश हलचल’, आसनसोल से डॉ. सुधांशु मिश्र तथा पटना से रूपा कुमारी शामिल रहीं।
समारोह के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि अटल जी न केवल एक कुशल राजनेता थे, बल्कि संवेदनशील कवि, प्रखर पत्रकार और लोकतंत्र के सशक्त प्रहरी भी थे। उनके विचार, भाषण और साहित्य आज भी राष्ट्रनिर्माण की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों और अतिथियों ने अटल बिहारी वाजपेयी जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। पूरा आयोजन साहित्यिक गरिमा, राष्ट्रीय चेतना और वैचारिक समर्पण से ओतप्रोत रहा।








