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पीआरएसआई के 47वें राष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत @2047 का लक्ष्य प्रभावी संवाद, मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था, जिम्मेदार मीडिया और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बिना संभव नहीं है। सम्मेलन में प्रशासन, मीडिया और शिक्षा जगत ने साझा रूप से भविष्य की रणनीति तय करने पर जोर दिया।
- पीआरएसआई के 47वें राष्ट्रीय सम्मेलन में विकसित भारत के रोडमैप पर गहन विमर्श
- 2047 तक मजबूत भारत के लिए प्रभावी संचार को बताया गया सबसे अहम आधार
- स्वास्थ्य, शिक्षा और मीडिया की साझा भूमिका पर विशेषज्ञों की एकराय
- विकसित भारत का सपना नीतियों से नहीं, संवाद से होगा साकार
देहरादून। भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में नीतियों के साथ-साथ उनके प्रभावी संप्रेषण को अनिवार्य बताया गया है। पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (पीआरएसआई) के 47वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन “2047 तक भारत को किस तरह विकसित किया जा सकता है” विषय पर आयोजित विचार-विमर्श में प्रशासन, मीडिया, शिक्षा और जनसंचार क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि संवाद के बिना विकास की परिकल्पना अधूरी है। सम्मेलन का दूसरा दिन विचारों के आदान-प्रदान, अनुभवों की साझेदारी और भविष्य की रणनीतियों को आकार देने का सशक्त मंच बना।
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वक्ताओं ने कहा कि तकनीकी प्रगति, डिजिटल गवर्नेंस और जनभागीदारी को मजबूती देने में जनसंचार की भूमिका आने वाले वर्षों में और अधिक निर्णायक होगी। विकसित भारत का सपना तभी साकार हो सकता है जब योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि सही समय पर सही भाषा में जनता तक पहुंचें। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मजबूत, सुलभ और तकनीक-सक्षम स्वास्थ्य व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी और दुर्गम राज्य में टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ सेवाओं ने स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदल दी है। इन माध्यमों से विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं और यह स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है, क्योंकि स्वस्थ समाज ही सशक्त राष्ट्र की नींव रखता है।
अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी ने सुशासन की सफलता को प्रभावी, पारदर्शी और संवेदनशील संचार से जोड़ते हुए कहा कि सरकार की योजनाएं तभी सफल होती हैं जब उनकी जानकारी सही और समय पर जनता तक पहुंचे। उन्होंने डिजिटल सूचना प्रणाली और सोशल मीडिया के माध्यम से जनसंपर्क को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड के 25 वर्षों के विकास की झलक प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और अकेले चारधाम यात्रा में इस वर्ष 50 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे हैं। इसके अलावा आदि कैलास, जागेश्वर धाम, कैंची धाम और मानस खंड मंदिरमाला के विकास कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में हर साल सात से आठ करोड़ पर्यटक आ रहे हैं और प्रति व्यक्ति आय व जीडीपी में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देने और स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार की 35 नीतियां लागू की गई हैं, जिससे पहाड़ों में रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने कहा कि विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान विकसित भारत की आधारशिला हैं। उन्होंने युवाओं को वैज्ञानिक सोच अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि विज्ञान संचार के माध्यम से शोध को समाज से जोड़ना आवश्यक है, ताकि नवाचार को जनआंदोलन का रूप दिया जा सके।
मीडिया की भूमिका पर जोर देते हुए वरिष्ठ पत्रकार और सत्र के मॉडरेटर संजीव कंडवाल ने कहा कि मीडिया शासन और समाज के बीच संवाद की मजबूत कड़ी है। जिम्मेदार, तथ्यपरक और संतुलित पत्रकारिता से ही लोकतंत्र सशक्त होता है और जनविश्वास कायम रहता है। सम्मेलन के अगले चरण में लोक सूचना विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. नितिन उपाध्याय ने कहा कि सूचना का प्रभावी प्रसार शासन की सफलता की कुंजी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से सरकारी योजनाओं और नीतियों को तेजी और पारदर्शिता के साथ जनता तक पहुंचाया जा रहा है और संचार प्रणाली को समय के अनुरूप लगातार अपडेट करना आवश्यक है।
सीआईएमएस कॉलेज के चेयरमैन ललित जोशी ने शिक्षा और मीडिया के समन्वय को समाज को जागरूक और सशक्त बनाने का माध्यम बताया। उन्होंने प्रोफेशनल शिक्षा में नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी को शामिल करने की जरूरत पर बल देते हुए युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील की और इसे देश के विकास में बड़ी बाधा बताया। एनडीटीवी के सीनियर एडिटर डॉ. हिमांशु शेखर ने डिजिटल युग में फेक न्यूज को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि मीडिया की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सूचना की विश्वसनीयता बनाए रखना है। वहीं न्यूज 18 के एडिटर अनुपम त्रिवेदी ने मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए कहा कि खबरों की गति के साथ उनकी सटीकता और सामाजिक प्रभाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
आईआईएमसी नई दिल्ली की प्रोफेसर डॉ. सुरभि दहिया ने कहा कि संचार शिक्षा का उद्देश्य केवल पेशेवर तैयार करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार और नैतिक नागरिक बनाना होना चाहिए। छात्रों को डिजिटल स्किल्स, नैतिक पत्रकारिता और सामाजिक समझ के साथ प्रशिक्षित करना समय की मांग है। सम्मेलन के दूसरे दिन की चर्चाओं से यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि विकसित भारत @2047 का लक्ष्य केवल नीतियों या संसाधनों से नहीं, बल्कि प्रभावी संवाद, जिम्मेदार मीडिया, मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है। पीआरएसआई का यह राष्ट्रीय सम्मेलन विचारों के आदान-प्रदान और देश के भविष्य की दिशा तय करने में एक महत्वपूर्ण और सार्थक मंच साबित हुआ।





