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देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी में आज पासिंग आउट परेड का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 491 युवा अधिकारी भारतीय सेना में शामिल होंगे। परेड की समीक्षा थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी करेंगे, जो स्वयं 1984 में इसी अकादमी से पास आउट हुए थे।
- 41 साल बाद उसी मैदान पर लौटे जनरल उपेंद्र द्विवेदी, जहां से बने थे अधिकारी
- 14 मित्र देशों के 34 कैडेट भी होंगे पास आउट
- महिला कैडेटों के प्रशिक्षण के नए युग में प्रवेश कर चुकी है IMA
- पासिंग आउट परेड के दौरान प्रेमनगर–पंडितवाड़ी जीरो जोन घोषित
देहरादून | देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी में आज पासिंग आउट परेड का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 491 युवा अधिकारी भारतीय सेना में शामिल होंगे। परेड की समीक्षा थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी करेंगे, जो स्वयं 1984 में इसी अकादमी से पास आउट हुए थे। देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी में शनिवार को पासिंग आउट परेड का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसके साथ ही भारतीय थल सेना को 491 युवा और प्रशिक्षित सैन्य अधिकारी प्राप्त होंगे। यह परेड अकादमी के चेटवुड भवन के सामने स्थित ऐतिहासिक ड्रिल स्क्वायर पर आयोजित होगी, जहां देश और विदेश से आए कैडेट अपने प्रशिक्षण की अंतिम कसौटी पर खरे उतरते हुए राष्ट्र सेवा की शपथ लेंगे।
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इस विशेष अवसर पर थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी रिव्यूइंग अफसर की भूमिका में होंगे। वह परेड का निरीक्षण करेंगे और पास आउट हो रहे ऑफिसर कैडेट्स की सलामी लेंगे। यह अवसर उनके लिए भी भावनात्मक रूप से खास है, क्योंकि जनरल उपेंद्र द्विवेदी स्वयं दिसंबर 1984 में भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट हुए थे और 41 वर्ष बाद उसी ऐतिहासिक मैदान पर अब सेना प्रमुख के रूप में लौट रहे हैं। आज सुबह आयोजित होने वाली परेड के बाद पीपिंग और ओथ सेरेमनी संपन्न होगी, जिसके साथ ही कुल 525 ऑफिसर कैडेट सेना में शामिल होंगे। इनमें से 491 कैडेट भारतीय थल सेना का हिस्सा बनेंगे, जबकि 14 मित्र देशों के 34 कैडेट अपने-अपने देशों की सेनाओं में अधिकारी के रूप में नियुक्त होंगे। यह भारतीय सैन्य अकादमी की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और प्रशिक्षण गुणवत्ता को भी दर्शाता है।
भारतीय सैन्य अकादमी की स्थापना एक अक्टूबर 1932 को हुई थी। पहले बैच में केवल 40 कैडेट पास आउट हुए थे, लेकिन नौ दशकों से अधिक की यात्रा में अकादमी ने अपनी प्रशिक्षण क्षमता को कई गुना बढ़ाया है। आज IMA देश-विदेश की सेनाओं को 66,000 से अधिक सैन्य अधिकारी दे चुकी है, जिनमें करीब तीन हजार अधिकारी मित्र देशों के भी शामिल हैं। एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में जुलाई 2025 से भारतीय सैन्य अकादमी में महिला कैडेटों का प्रशिक्षण भी शुरू हो चुका है। यह कदम भारतीय सेना में लैंगिक समानता और समावेशिता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है और आने वाले वर्षों में इसका प्रभाव और व्यापक रूप से दिखाई देगा।
परेड के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सैन्य अकादमी परिसर और उसके आसपास सेना के जवान तैनात रहेंगे, जबकि बाहरी सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस के पास होगी। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए सुबह छह बजे से दोपहर 12:30 बजे तक पंडितवाड़ी से प्रेमनगर तक का क्षेत्र जीरो जोन घोषित किया गया है। पासिंग आउट परेड न केवल नए अधिकारियों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है, जब अनुशासन, परंपरा और बलिदान की भावना के साथ एक नई पीढ़ी भारतीय सेना में कदम रखती है।





