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देहरादून में एमडीडीए अब ड्रोन सर्विलांस सिस्टम के माध्यम से अवैध निर्माण, प्लॉटिंग और फ्लोर उल्लंघन पर रियल टाइम निगरानी करेगा। इससे छिपे हुए निर्माण, खेतों में प्लाटिंग और नियम उल्लंघन के मामलों पर तुरंत डिजिटल सबूत जुटाकर तेज कार्रवाई की जाएगी।
- ड्रोन फुटेज बनेगा डिजिटल सबूत, एमडीडीए हर सप्ताह लेगा रिपोर्ट और करेगा त्वरित एक्शन
- शिमला बाईपास, रायपुर, सहस्रधारा रोड समेत कई इलाकों में अवैध प्लाटिंग पर रखी जाएगी पैनी नजर
- दो मंजिल से ऊपर निर्माण और स्टिल्ट पार्किंग घोटालों पर होगी विशेष निगरानी
- दून के विकास को पटरी पर लाने के लिए ड्रोन ग्रिड की तैयारी, पूरे शहर की हाईटेक मैपिंग होगी शुरू
देहरादून। देहरादून में तेजी से फैल रहे अवैध निर्माण, बिना स्वीकृत नक्शों के फ्लोर बढ़ाने और खेतों में अवैध प्लॉट काटने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) अब हाईटेक मोड में कदम बढ़ा चुका है। प्राधिकरण ने ड्रोन सर्विलांस सिस्टम को सक्रिय करने की तैयारी पूरी कर ली है, जिसके बाद पूरे शहर का हवाई निरीक्षण नियमित रूप से किया जाएगा।
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ड्रोन तकनीक के जरिए एमडीडीए की टीमें जमीन की वास्तविक स्थिति का हाई-रिज़ॉल्यूशन वीडियो और फोटो रिकॉर्ड प्राप्त करेंगी। इससे उन स्थानों को तुरंत चिन्हित किया जा सकेगा, जहाँ बिना मंजूरी के निर्माण, अवैध प्लॉटिंग, मानचित्र स्वीकृति के विपरीत गतिविधियां या गुप्त रूप से चल रहे निर्माण कार्य किए जा रहे हों। कई बार शिकायत दर्ज होने के बाद जब अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं, तब तक निर्माणकर्ता सबूत मिटा देते हैं या निर्माण की स्थिति बदल जाती है। ऐसे मामलों में अब ड्रोन फुटेज निर्णायक डिजिटल सबूत के रूप में केस फाइल में जोड़ा जाएगा और उसी के आधार पर तत्काल कार्रवाई संभव होगी।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के अनुसार, जिन क्षेत्रों में लगातार शिकायतें मिल रही हैं, वहां विशेष फ्लाइंग सर्विलांस प्लान बनाया गया है। ड्रोन टीम हर सप्ताह एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर दंडात्मक कार्रवाई, नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया तेज होगी। शिमला बाईपास, सहस्रधारा रोड, सहसपुर, रायपुर, सेलाकुई, डोईवाला, पौंधा, हर्रावाला, भानियावाला और ऋषिकेश रोड के आसपास के इलाकों में खेतों में अवैध प्लॉटिंग के मामले बढ़े हैं, जिन्हें अब रियल टाइम इमेजरी के माध्यम से तुरंत पकड़ लिया जाएगा।
वर्तमान स्थिति चिंताजनक है—दो मंजिल से अधिक निर्माण, स्टिल्ट पार्किंग की जगह दुकानों और व्यावसायिक यूनिट्स का निर्माण, अवैध कॉलोनियां और बिना स्वीकृति फ्लोर बढ़ाने जैसे मामलों में हाल के महीनों में भारी वृद्धि हुई है। इस कारण शहर की यातायात संरचना, पार्किंग व्यवस्था और सुरक्षा मानक लगातार प्रभावित हो रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में ड्रोन सर्विलांस एमडीडीए के लिए एक प्रभावी हथियार साबित होने जा रहा है।
ड्रोन उड़ान के दौरान ली गई हाई-रिज़ॉल्यूशन फुटेज से नई दीवारें, खुदाई, प्लॉटिंग पैटर्न और संरचना में बदलाव तुरंत पहचाने जा सकेंगे। पहले जहां पहाड़ी इलाकों और खेतों में गुप्त रूप से निर्माण छिपा दिया जाता था, वहीं अब इन गतिविधियों पर तत्काल पकड़ बनाई जा सकेगी। इसके अलावा फर्जी लेआउट दिखाकर जमीन बेचने वाले प्लॉटर्स पर भी अब कड़ी monitoring संभव होगी।
एमडीडीए का दावा है कि आने वाले महीनों में पूरे शहर को एक ड्रोन ग्रिड में लाया जाएगा, जिसमें निर्माण से जुड़े हर बदलाव का रियल टाइम रिकॉर्ड उपलब्ध होगा। यह व्यवस्था दून में अव्यवस्थित विकास पर न केवल अंकुश लगाएगी, बल्कि नियमों के अनुरूप शहर के विकास को भी नई दिशा देगी। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के अनुसार, ‘‘दून में अवैध निर्माण रोकने और सुनियोजित विकास कायम करने के लिए ड्रोन आधारित निगरानी अब अनिवार्य कदम बन चुकी है।’’
इस हाईटेक कार्रवाई के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि देहरादून में अनियमित निर्माण गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण होगा और शहर में कानून आधारित विकास का नया मानक स्थापित होगा।





