
🌟🌟🌟
हरिद्वार की तीन वर्षीय बच्ची कफ सीरप की ओवरडोज से गंभीर रूप से बीमार हो गई, लेकिन दून मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने दस दिन की कठिन मेडिकल प्रक्रिया के बाद उसकी जान बचा ली। डॉक्टरों ने अभिभावकों से बिना जांच और परामर्श के किसी भी दवा, खासकर कफ सीरप, बच्चों को न देने की अपील की है।
- दून मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की टीम ने ओवरडोज पीड़ित बच्ची को दिया जीवनदान
- हरिद्वार की मासूम ने झेला कफ सीरप का खतरनाक असर, कई बार करना पड़ा इंटुबेशन
- बीपी गिरा, दिल की धड़कन धीमी, सांस बंद—गंभीर हालत में 3 दिसंबर को लाई गई थी बच्ची
- डॉक्टरों की अपील: बच्चों को बिना जांच-पड़ताल व बिना सलाह के कफ सीरप न दें
देहरादून। दून मेडिकल कालेज में गुरुवार को वह बच्ची स्वस्थ होकर डिस्चार्ज की गई जिसे हरिद्वार के भगवानपुर से कफ सीरप की ओवरडोज के कारण गंभीर हालात में तीन दिसंबर को आपातकालीन विभाग लाया गया था। तीन वर्षीय गार्विका को उसके परिजन तब अस्पताल लाए, जब खांसी की शिकायत पर उसे एक स्थानीय मेडिकल स्टोर से खरीदा गया कफ सीरप पिलाया गया और उसकी स्थिति अचानक खराब होने लगी। परिजनों ने उसे निजी अस्पतालों में भी दिखाया, लेकिन वहां डॉक्टर मामले की गंभीरता को देखते हुए उचित इलाज देने में असमर्थ रहे। इसके बाद बच्ची को दून मेडिकल कालेज रेफर किया गया।
Government Advertisement...
अस्पताल के बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि बच्ची को लाने के समय उसकी स्थिति नाजुक थी—पैर सुन्न थे, बीपी काफी गिर चुका था, दिल की धड़कन बेहद धीमी थी और बच्ची सांस नहीं ले पा रही थी जिसके कारण वह बेहोश पड़ी थी। आंखों की पुतलियां भी प्रतिक्रिया नहीं दे रही थीं। इस गंभीर स्थिति में सबसे पहले बच्ची को लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया और सांस लेने के लिए वेंटिलेटर की सहायता देनी पड़ी।
डॉ. अशोक कुमार के निर्देशन में डॉ. तन्वी, डॉ. आयशा, डॉ. कुलदीप सिंह और डॉ. आस्था भंडारी की टीम ने मिलकर लगातार उसकी हालात को संभाला। एंटीबायोटिक्स—सेफ्ट्रियाक्सोन और वैनकोमाइसिन—की उच्च स्तरीय खुराक दी गई। कई बार इंटुबेशन करना पड़ा और फिर एक्सटुबेशन की प्रक्रिया के जरिए धीरे-धीरे बच्ची को सांस लेने में सहायता दी गई। पांचवें दिन बच्ची की आंखों की पुतलियों में हलचल शुरू हुई, जिसके बाद डॉक्टरों को उम्मीद जगी कि उसकी न्यूरोलॉजिकल गतिविधियां वापस लौट रही हैं।
लगातार दस दिन की निगरानी, उपचार और जीवन-रक्षक प्रक्रियाओं के बाद बच्ची की सेहत में सुधार होने लगा और आखिरकार उसे गुरुवार को पूरी तरह स्वस्थ स्थिति में डिस्चार्ज कर दिया गया। डॉक्टरों ने अभिभावकों को चेतावनी देते हुए कहा कि कफ सीरप समेत कई दवाइयों पर प्रतिबंध लगे होते हैं, लेकिन सस्ते विकल्प और जागरूकता की कमी के कारण लोग बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चों को दवाएं पिला देते हैं, जो कई बार जानलेवा साबित हो सकता है।
यह घटना अभिभावकों के लिए गंभीर चेतावनी है कि बच्चों को किसी भी दवा की खुराक बिना विशेषज्ञ की सलाह के न दें, क्योंकि छोटी-सी लापरवाही बड़े खतरे में बदल सकती है।






