
🌟🌟🌟
योगी आदित्यनाथ सरकार ने उत्तर प्रदेश में घुसपैठियों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान शुरू कर दिया है, जिसे “सर्जिकल स्ट्राइक” जैसा सख्त कदम बताया गया है। इस कार्रवाई का लक्ष्य अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या, बांग्लादेशी और संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें निरुद्ध केंद्रों में भेजना है ताकि सुरक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र लोगों तक पहुंचे।
- योगी सरकार का सुरक्षा मॉडल: कठोर नीति और तेज़ कार्रवाई
- रोहिंग्या व बांग्लादेशी घुसपैठियों पर सरकार की निर्णायक रणनीति
- निरुद्ध केंद्रों की स्थापना: सुरक्षा तंत्र को अभेद बनाने की पहल
- स्थानीय निकायों और नागरिकों की भूमिका: पहचान सत्यापन में बढ़ी सक्रियता
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने आंतरिक सुरक्षा को कठोर और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़े अभियान की शुरुआत कर दी है। सरकारी बयान के अनुसार, राज्य में मौजूद घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें निरुद्ध केंद्रों में रखा जाएगा, जहां सुरक्षा व्यवस्था अभेद और पूरी तरह कड़ी होगी। सरकार का दावा है कि यह अभियान प्रदेश में अपराध रोकथाम को मजबूत करेगा, अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण लाएगा और सरकारी योजनाओं पर अपात्र लोगों के कब्जे को समाप्त करेगा। पिछले कई वर्षों से सरकार को यह शिकायत मिल रही थी कि रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण सरकारी संसाधनों पर अनधिकृत बोझ बढ़ रहा है और योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र नागरिकों तक नहीं पहुंच पा रहा। अब जब सरकार ने ‘कतई बर्दाश्त नहीं’ की नीति के तहत कठोर कार्रवाई शुरू की है, तो इसका असर सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक संतुलन दोनों पर दिखाई देने लगा है।
Government Advertisement...
सरकार के बयान में दोहराया गया कि अवैध रूप से रह रहे घुसपैठिये प्रदेश की योजनाओं का फायदा उठाते रहे हैं। ऐसे में पहचान सुनिश्चित होने के बाद हकदार लोगों तक लाभ समय पर पहुंचेगा। निरुद्ध केंद्रों का निर्माण हर मंडल में किया जा रहा है, जहां संदिग्ध विदेशी नागरिकों को दस्तावेज़ सत्यापन के बाद रखा जाएगा। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि इन केंद्रों की सुरक्षा ऐसी होगी जिसे भेद पाना किसी के लिए भी नामुमकिन होगा। इससे न सिर्फ अपराध कम होंगे, बल्कि लोगों का भरोसा भी शासन-प्रशासन पर बढ़ेगा।
इस कार्रवाई के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आम नागरिकों को भी सचेत रहने को कहा है। उन्होंने अपील की कि घरेलू या व्यावसायिक कार्यों में किसी भी व्यक्ति को नियुक्त करने से पहले उसकी पहचान का सत्यापन अवश्य करें, क्योंकि राज्य की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने ‘एक्स’ पर की गई एक पोस्ट में सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया जिसमें कहा गया कि घुसपैठियों के लिए “लाल कालीन बिछाकर स्वागत” नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश की सुरक्षा और सामाजिक संतुलन के महत्व से जोड़ते हुए कहा कि संसाधनों पर अधिकार नागरिकों का है, घुसपैठियों का नहीं।
योगी सरकार ने सभी शहरी स्थानीय निकायों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में रोहिंग्या, बांग्लादेशी और संदिग्ध विदेशी नागरिकों की सूची तैयार करें। दस्तावेज सत्यापन अभियान के तहत कई इलाकों में पुलिस की संयुक्त टीमें सक्रिय होकर गांव, कस्बों, बाजारों और गलियों में लोगों की पहचान की जांच कर रही हैं। लखनऊ सहित कई शहरों में जनप्रतिनिधि भी अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। लखनऊ की मेयर स्वयं सड़कों पर उतरकर व्यापारियों और दुकानदारों से बातचीत कर रही हैं, उन्हें जानकारी दे रही हैं कि किसी भी व्यक्ति को नौकरी पर रखने से पहले उसकी पहचान जांच आवश्यक है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को एक नए स्तर पर ले जाएगा। रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों पर कार्रवाई लंबे समय से राज्य की चुनौती रही है, और अब व्यापक स्तर पर उठाए जा रहे इस कदम से आने वाले समय में सरकारी संसाधनों पर अनधिकृत बोझ कम होगा। सरकार का लक्ष्य है कि जो भी व्यक्ति प्रदेश में बिना वैध दस्तावेजों के मौजूद है, उसकी पहचान की जाए और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाए।
इस व्यापक अभियान से पूरे प्रदेश में सुरक्षा तंत्र और अधिक सुदृढ़ होगा। प्रशासन का मानना है कि यह कदम न केवल अपराध रोकने में कारगर होगा, बल्कि लोगों में यह संदेश भी जाएगा कि राज्य सरकार सुरक्षा के मुद्दे पर किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। घुसपैठियों की पहचान, दस्तावेज सत्यापन और निरुद्ध केंद्रों की स्थापना के साथ यह अभियान आने वाले दिनों में और अधिक कठोर रूप ले सकता है।







