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जौनसार बावर के दसऊ मंदिर से छत्रधारी चालदा महासू महाराज की भव्य प्रवास यात्रा शुभ मुहूर्त में शुरू हुई, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। पहली बार सिरमौर जिले के पश्मी गांव जा रहे देवता के स्वागत के लिए साढ़े तीन सौ ग्रामीण विशेष रूप से पहुंचे।
- सिरमौर में पहली बार पहुंचेंगे चालदा महासू महाराज, श्रद्धालुओं में उत्सव जैसा माहौल
- दसऊ मंदिर से रवाना हुई चालदा देवता की पालकी, हजारों भक्तों ने किए दर्शन
- हिमाचल के पश्मी गांव से साढ़े तीन सौ ग्रामीण देवता को लेने पहुंचे
- छत्रधारी चालदा महासू महाराज की छह दिवसीय प्रवास यात्रा शुरू, सातवें दिन होंगे विराजमान
देहरादून। जौनसार बावर के दसऊ गांव स्थित प्राचीन मंदिर से छत्रधारी चालदा महासू महाराज की ऐतिहासिक प्रवास यात्रा सोमवार को शुभ मुहूर्त में आरंभ हो गई। जैसे ही गर्भगृह से देवता की पालकी बाहर आई, पूरा वातावरण आस्था और भक्ति से भर उठा। ढोल-दमाउ, रणभेरों और जयकारों के बीच हजारों श्रद्धालु अपने आराध्य देव के दर्शन को उमड़ पड़े। हर ओर भक्तों में अपार उत्साह, श्रद्धा और भावुकता देखने को मिली।
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इस महत्वपूर्ण यात्रा में सबसे विशेष रहा कि पहली बार चालदा महासू महाराज हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के पश्मी गांव की ओर जा रहे हैं। देवता के स्वागत के लिए हिमाचल के पश्मी और द्राबिल गांवों से साढ़े तीन सौ ग्रामीण विशेष रूप से दसऊ पहुंचे। दसऊ खत के ग्रामीणों ने पुष्पवृष्टि और मालाओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया। देवता की पालकी को देखकर ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं—दसऊ गांव में जहां देवता के जाने की मायूसी थी, वहीं सिरमौर में उनके आने की खुशी चरम पर है।
छत्रधारी चालदा महासू महाराज चार महासू भाइयों में सबसे अनुज और चलायमान देवता माने जाते हैं, जो लगातार विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर अपने भक्तों के कष्ट दूर करते हैं। इस बार की यात्रा इसलिए और भी ऐतिहासिक है क्योंकि उनके सिरमौर प्रवास का सैकड़ों वर्षों से प्रतीक्षित अवसर अब साकार हो रहा है। श्रद्धालुओं के अनुसार यह क्षण “परम सौभाग्य” और “सांस्कृतिक विरासत का अनमोल पर्व” है।
देवता की छह दिवसीय यह यात्रा कई रात्रि-विश्राम स्थलों से होकर गुजरेगी। 8 दिसंबर को उनका ठहराव दसऊ में रहेगा, जबकि आगे की यात्रा 10 दिसंबर को भूपऊ, 11 दिसंबर को म्यार खेड़ा, 12 दिसंबर को सावड़ा, 13 दिसंबर को द्राबिल में निर्धारित है। अंतिम पड़ाव सिरमौर के पश्मी गांव में होगा, जहां 14 दिसंबर को देवता नए भव्य मंदिर में एक वर्ष के लिए विराजमान होंगे।
यात्रा मार्ग में जगह-जगह ग्रामीणों ने फूलों, पारंपरिक संगीत और देवभाव से चालदा महाराज का स्वागत किया। श्रद्धालुओं में यह विश्वास है कि देवता के आगमन से क्षेत्र में शांति, समृद्धि और सुख-समृद्धि का प्रसार होगा। अनुमान है कि इस ऐतिहासिक प्रवास में तीस हजार से अधिक श्रद्धालु सम्मिलित होंगे, जो इसे जौनसार–सिरमौर का अब तक का सबसे बड़ा सांस्कृतिक आयोजन बना सकता है।





