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पीसीएस प्री परीक्षा 2025 में प्रश्न संख्या 70 की त्रुटि पर उठी शिकायतों के बाद नैनीताल हाईकोर्ट ने इसे गलत मानते हुए मूल्यांकन प्रक्रिया से हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि त्रुटिपूर्ण प्रश्न के आधार पर परिणाम तय नहीं हो सकते, इसलिए संशोधित परिणाम जारी किए जाएं।
- पीसीएस प्री 2025 में त्रुटिपूर्ण सवाल, हाईकोर्ट ने कहा—मूल्यांकन से हटाएं
- फूड सिक्योरिटी बनाम फूड सेफ्टी—एक गलती ने परीक्षा को विवादों में घेरा
- अभ्यर्थियों को राहत: हाईकोर्ट ने आयोग को दिया पुनर्मूल्यांकन का आदेश
- पीसीएस प्री परीक्षा विवाद गहराया, अब बदला जाएगा पूरा रिजल्ट
देहरादून। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित पीसीएस प्री परीक्षा 2025 एक त्रुटिपूर्ण प्रश्न के कारण विवादों में गहरे फंस गई है। अभ्यर्थियों द्वारा दर्ज की गई शिकायतों की सुनवाई करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से माना कि आयोग ने परीक्षा में ऐसा गलत प्रश्न शामिल किया था, जो न केवल भ्रमित करने वाला था, बल्कि मूल्यांकन की निष्पक्षता को भी प्रभावित कर सकता था। कोर्ट ने आयोग को आदेश दिया है कि इस प्रश्न को पूरी तरह हटाते हुए नए सिरे से मूल्यांकन किया जाए और संशोधित परिणाम जारी किए जाएं।
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29 जून को आयोजित परीक्षा में प्रश्न संख्या 70 ने अभ्यर्थियों का ध्यान खींचा था। प्रश्न में “फूड सिक्योरिटी इंडेक्स” का उल्लेख किया गया था, जबकि इसे “फूड सेफ्टी इंडेक्स” होना चाहिए था। इसी एक शब्द की त्रुटि ने न सिर्फ प्रश्न का अर्थ बदल दिया, बल्कि विकल्पों की प्रासंगिकता भी संदिग्ध बना दी। प्रश्न में पूछा गया था कि—“उत्तराखंड को छठे फूड सिक्योरिटी इंडेक्स 2024 में कुल कितने अंक प्राप्त हुए?” जबकि विकल्प (ग) में दिए गए अंक वास्तव में “छठे फूड सेफ्टी इंडेक्स 2023–24” से जुड़े थे।
इसके बाद अभ्यर्थियों ने तर्क दिया कि जब प्रश्न ही गलत है, तो आयोग द्वारा उसके विकल्प (ग) को सही घोषित करना भी असंगत है। उन्होंने यह भी कहा कि इस त्रुटि के कारण परीक्षा के मूल्यांकन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिससे मेरिट क्रम और चयन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हाईकोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए कहा कि प्रश्न मूल रूप से ही गलत था, इसलिए इसे मूल्यांकन का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता। हाईकोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया है कि वह प्रश्न संख्या 70 को हटाकर नए सिरे से पुनर्मूल्यांकन करे और उसके बाद संशोधित परिणाम जारी करे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पारदर्शिता और निष्पक्षता किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की आधारशिला होती है, इसलिए इस तरह की त्रुटियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। इस फैसले ने हजारों अभ्यर्थियों को राहत दी है, जो पिछले कई दिनों से इस त्रुटि को लेकर आशंकित थे। अब आयोग को दोबारा मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी करनी होगी और परिणाम जारी करने की तैयारी शुरू करनी होगी। अभ्यर्थी उम्मीद कर रहे हैं कि संशोधित परिणाम जल्द जारी होंगे, ताकि मुख्य परीक्षा सहित आगे की पूरी चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।
यह मामला एक बार फिर आयोग की प्रश्न निर्माण और सत्यापन प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगा गया है, और यह संकेत देता है कि भविष्य में परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए और अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।





