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देहरादून में आयोजित माल्टा पार्टी के मंच से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सरकार पर हमला बोलते हुए पहाड़ के नींबू और माल्टे को दिए गए कम मूल्य को किसानों का अपमान बताया। इस कार्यक्रम ने न केवल पहाड़ी उत्पादों के उचित मूल्य की बहस छेड़ दी, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी नई गरमाहट ला दी है।
- माल्टा पार्टी में हरीश रावत का सरकार पर हमला—नींबू और माल्टे को कम कीमत देना अन्याय
- हरीश रावत बोले—नींबू पहाड़ का पीला सोना, सरकार कर रही अपमान
- कांग्रेस का आरोप—पहाड़ी किसानों को मिल रहा कम मूल्य, समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग
- माल्टा पार्टी में राजनीति गरमाई, पहाड़ी उत्पादों के MSP पर नई बहस
देहरादून। राजधानी में आयोजित माल्टा पार्टी के बहाने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश सरकार पर तीखा वार किया और पहाड़ी किसानों की उपज को दी गई कीमतों को सीधा “अपमान” बताया। हरिद्वार बाईपास रोड स्थित एक होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में रावत ने कहा कि पहाड़ का नींबू और माल्टा केवल फल नहीं, बल्कि मध्य हिमालय का आर्थिक आधार हैं। उन्होंने व्यंग्य में कहा कि नींबू पहाड़ का “पीला सोना” है, लेकिन सरकार ने इसके मूल्य सात रुपये प्रति किलो और माल्टे के दस रुपये प्रति किलो तय कर किसानों के साथ अन्याय किया है। रावत के अनुसार ये कीमतें न केवल किसानों की मेहनत का अपमान हैं, बल्कि पहाड़ी अर्थव्यवस्था पर चोट भी हैं।
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रावत ने स्पष्ट रूप से मांग की कि नींबू का न्यूनतम समर्थन मूल्य कम से कम 20 रुपये प्रति किलो और माल्टे का 25 रुपये प्रति किलो तय किया जाए। उनके अनुसार ऐसा करने से न केवल स्थानीय किसानों को राहत मिलेगी, बल्कि मध्य हिमालय के पर्यावरण संरक्षण को भी प्रोत्साहन मिलेगा। रावत ने कहा कि माल्टा पार्टी आयोजित करने का उद्देश्य लोगों को गैरसैंण, मैहलचोरी और लोहाघाट जैसे पहाड़ी क्षेत्रों के असली माल्टे का स्वाद और पहचान याद दिलाना है, क्योंकि आधुनिक बाजार में इन पारंपरिक उत्पादों की पहचान धीरे-धीरे धूमिल होती जा रही है।
कार्यक्रम में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा से उत्तराखंड के पारंपरिक फलों, सब्जियों और उत्पादों को उचित कीमत दिलाने के लिए संघर्ष करती रही है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी किसानों की आय बढ़ाने के लिए समर्थन मूल्य बढ़ाना ज़रूरी है। कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने याद दिलाया कि हरीश रावत के कार्यकाल में पहाड़ी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए थे, जिनमें माल्टा उत्पादन पर प्रति किलो 15 रुपये की सब्सिडी शामिल रही है।
माल्टा पार्टी में स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ी और लोगों ने गैरसैंण और लोहाघाट के माल्टों के साथ पारंपरिक गडेरी के गुटके, अमरूद, कीवी और सिलबट्टे की चटनी का स्वाद भी लिया। कार्यक्रम में आयोजित माल्टा खाने की प्रतियोगिता भी आकर्षण का केंद्र रही। महिला वर्ग में उर्मिला थापा विजयी रहीं, जबकि पुरुष वर्ग में सूरज क्षेत्री ने 13 माल्टे खाकर पहला स्थान हासिल किया। कार्यक्रम के दौरान एक क्षण ऐसा भी आया जिसने माहौल को असहज कर दिया। पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को जब मंच से संबोधित करने के लिए बुलाया गया, तो बीच में हुई टोका-टाकी से वे बोल ही नहीं पाए। बाद में उन्हें दोबारा बुलाया गया, लेकिन उन्होंने मंच पर लौटना उचित नहीं समझा। यह स्थिति कार्यक्रम में चर्चा का विषय बनी रही।
कार्यक्रम के समापन पर हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कार्यकर्ताओं से 14 दिसंबर को दिल्ली में होने वाली कांग्रेस की रैली में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान किया। कांग्रेस इस रैली को प्रदेश स्तर पर अपनी शक्ति प्रदर्शन रैली के रूप में देख रही है, ताकि आने वाले दिनों में पहाड़ी मुद्दों, किसानों की आय और स्थानीय उत्पादों के समर्थन मूल्य को लेकर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत कर सके।
माल्टा पार्टी के मंच से प्रदेश सरकार पर किए गए इस सीधे हमले ने उत्तराखंड की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। पहाड़ी फलों के उचित मूल्य की मांग आने वाले दिनों में सियासी हलकों और किसानों की बैठकों में प्रमुख मुद्दा बन सकती है, जिससे राजनीति की गर्माहट और बढ़ने की संभावना है।





