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राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रायपुर, देहरादून में आयोजित आईपीआर सेल की पांचवीं व्याख्यान श्रृंखला में स्वरोजगार की संभावनाओं और सरकारी योजनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि सीमित नौकरियों के बीच स्वरोजगार ही युवाओं के लिए बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है।
- उत्तराखंड में स्वरोजगार की संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने रखा दृष्टिकोण
- महावीर सिंह सजवान बोले—रोजगार सीमित, स्वरोजगार ही भविष्य
- बेडू, बद्री घी सहित 29 उत्पादों को मिल चुका है जीआई टैग
- मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना युवाओं के लिए वरदान: वक्ता
देहरादून | राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रायपुर, देहरादून में आईपीआर सेल के अंतर्गत पांचवीं व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया गया, जिसमें स्वरोजगार और उससे जुड़ी संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के संरक्षक एवं प्राचार्य प्रोफेसर विनोद प्रकाश अग्रवाल ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में रोजगार के अवसरों में विविधता आई है और सरकार भी युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक योजनाएँ चला रही है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विनोद कुमार शाह ने किया, जबकि मुख्य वक्ता का परिचय डॉ. सुमन सिंह गुसाईं द्वारा कराया गया।
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प्राचार्य प्रोफेसर विनोद प्रकाश अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि नई आर्थिक परिस्थितियों में स्वरोजगार अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुका है। आज सरकार की कई योजनाएँ युवाओं को अपने व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं, जिससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक मजबूती भी आ रही है।
मुख्य वक्ता डॉ. महावीर सिंह सजवान ने उत्तराखंड में स्वरोजगार की संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों की संख्या सीमित है, इसलिए राज्य सरकार युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित कर रही है। उन्होंने होमस्टे, राफ्टिंग, बंजी जंपिंग जैसे पर्यटन आधारित व्यवसायों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में युवाओं के लिए बड़े अवसर मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत सरकार 70% स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के लक्ष्य के साथ 25 लाख रुपये तक की सहायता राशि उपलब्ध करा रही है, जिससे हजारों युवाओं को अपने व्यवसाय स्थापित करने में मदद मिली है।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी उत्पाद को बाजार में पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उत्तराखंड के अब तक 29 उत्पादों को जीआई मान्यता मिल चुकी है, जिनमें बेडू, बद्री घी और मुनस्यारी राजमा जैसे स्थानीय उत्पाद शामिल हैं। उन्होंने उद्योग रोजगार ऐप पर निशुल्क पंजीकरण कराने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इससे स्वरोजगार शुरू करने वाले युवाओं को बैंक लोन और अन्य सहायता प्राप्त करने में आसानी होती है। उन्होंने महाविद्यालय में निशुल्क स्वरोजगार प्रशिक्षण करवाने की घोषणा भी की।
कार्यक्रम में आईपीआर सेल की नोडल अधिकारी डॉ. कविता काला ने उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए कहा कि आज स्वरोजगार ने अनेक क्षेत्रों में लोगों को सफलता दिलाई है। उन्होंने सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे अवसरों का लाभ उठाने पर विशेष जोर दिया। साथ ही उन्होंने मुख्य वक्ता, प्राचार्य, उपस्थित प्राध्यापकगण, कर्मचारी वर्ग एवं छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर आइपीआर सेल के सदस्य डॉ. अनीता चौहान, डॉ. डिंपल भट्ट, डॉ. श्रुति चौकियाल, डॉ. लीना रावत, डॉ. उमा पपनोई सहित अनेक प्राध्यापक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।





