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उत्तराखंड आईटीडीए ने एक उन्नत एआई सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जो सरकारी बैठकों की हर बातचीत को सुनकर सेकेंडों में सटीक मिनट्स तैयार कर देता है। इससे महीनों तक चलने वाली प्रक्रिया अब तत्काल और त्रुटिरहित हो जाएगी।
- एआई सॉफ्टवेयर से मिनट्स तैयार करने की प्रक्रिया होगी तेज, हफ्तों का काम सेकेंडों में
- उत्तराखंड में सरकारी बैठकों के लिए एआई आधारित मिनट्स सिस्टम का सफल ट्रायल
- आईटीडीए ने बनाया उन्नत एआई टूल, सचिव स्तरीय काम अब बिना देरी पूरा
देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी कामकाज में एक बड़ी तकनीकी क्रांति आने वाली है। सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) ने ऐसा एआई आधारित सॉफ्टवेयर विकसित कर लिया है, जो किसी भी विभाग की बैठक में होने वाली पूरी चर्चा को वास्तविक समय में सुनकर सेकेंडों में विस्तृत और श्रेणीबद्ध मिनट्स तैयार कर देता है। अब वह समय बीत चुका है जब अनुभाग अधिकारी या उप सचिव बैठक समाप्त होने के बाद दिनों और हफ्तों तक मिनट्स तैयार करते थे और फिर सचिव स्तर की जांच के बाद उसे जारी किया जाता था।
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इस लंबे और दोहराव से भरे काम को खत्म करने के लिए आईटीडीए कई महीनों से एआई आधारित मिनट्स जेनरेशन सिस्टम पर काम कर रहा था। हाल ही में मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में इस एआई सॉफ्टवेयर का लाइव ट्रायल किया गया। सॉफ्टवेयर को लैपटॉप सिस्टम पर सक्रिय रखा गया, जिसने पूरी बैठक की चर्चा को ध्यानपूर्वक सुना और रिकॉर्ड किया। जैसे ही बैठक समाप्त हुई, उसी क्षण सॉफ्टवेयर ने सेकेंडों में पूरा मिनट्स दस्तावेज तैयार कर दिया।
मुख्य सचिव और अन्य सचिवों ने एआई द्वारा तैयार मिनट्स को जांचा और पाया कि सॉफ्टवेयर ने न केवल बातचीत को ठीक उसी क्रम में दर्ज किया, बल्कि विषयवार श्रेणीकरण भी किया था। अधिकारियों ने बताया कि एआई टूल ने उन बिंदुओं को भी साफ-साफ पहचान लिया, जो अक्सर मैन्युअल मिनट्स में दोहराव या चूक के कारण अस्पष्ट रह जाते थे।
आईटीडीए के तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, यह सॉफ्टवेयर भारतीय सरकारी बैठकों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिसमें मिश्रित भाषा, संस्थागत शब्दावली और विभागीय शैली को समझने की क्षमता शामिल है। यह सिस्टम चर्चा के प्रत्येक बिंदु को अलग-अलग सेक्शन में विभाजित करता है, जिससे निर्णय, सुझाव और कार्ययोजना स्पष्ट दिखाई देती है।
इस एआई टूल के नियमित उपयोग से विभागों में समय और संसाधनों की बचत होगी। साथ ही पहले होने वाली देरी, दोहराव और मानवीय त्रुटियों में भी भारी कमी आएगी। अधिकारी इस बात पर सहमत हैं कि इससे प्रशासनिक गति बढ़ेगी और बैठक के फैसलों को समय पर लागू करने में भी बड़ी मदद मिलेगी।
उत्तराखंड सरकार आने वाले दिनों में इस तकनीक को सभी महत्वपूर्ण विभागों में लागू करने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि यह प्रयोग पूरी तरह सफल हुआ, तो इससे शासन व्यवस्था में पारदर्शिता, गति और दक्षता तीनों में उल्लेखनीय सुधार आएगा।





