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हरिद्वार के हरकी पौड़ी क्षेत्र में सुरक्षा तैयारियों को जांचने के लिए पुलिस व विभिन्न एजेंसियों ने बड़े पैमाने पर मॉकड्रिल की। तीन चरणों में हुए अभ्यास में संदिग्ध बैग, बंधक बनाने और आग लगने की काल्पनिक स्थितियों पर तुरंत प्रतिक्रिया का परीक्षण किया गया।
- हरिद्वार में पुलिस, एटीएस और बीडीएस की संयुक्त मॉकड्रिल
- संदिग्ध बैग की सूचना से हरकी पौड़ी पर मचा हड़कंप
- घंटाघर पर बंधक बनाने की स्थिति का रियल टाइम अभ्यास
- सुभाष घाट पर आग लगने की सूचना पर दमकल की त्वरित कार्रवाई
हरिद्वार | हरिद्वार में 04 दिसंबर 2025 को हरकी पौड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती और आपात स्थिति में प्रशासनिक प्रतिक्रिया की क्षमता को जांचने के उद्देश्य से पुलिस, एटीएस, बीडीएस, फायर सर्विस सहित अनेक एजेंसियों ने संयुक्त मॉकड्रिल का आयोजन किया। यह अभ्यास इतना वास्तविक लग रहा था कि कुछ समय के लिए पूरे क्षेत्र में तनाव का वातावरण बन गया, हालांकि बाद में स्पष्ट हुआ कि यह सुरक्षा तंत्र की तत्परता परखने का अभ्यास था।
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सबसे पहला अलर्ट दोपहर करीब 2 बजे मिला, जब पुलिस कंट्रोल रूम को हरकी पौड़ी के मालवीय घाट पर शंकराचार्य जी की मूर्ति के पास एक संदिग्ध बैग देखे जाने की सूचना प्राप्त हुई। हरकी पौड़ी चौकी इंचार्ज व टीम ने तुरंत बिना किसी अफरा-तफरी के आसपास मौजूद श्रद्धालुओं व पर्यटकों को सुरक्षित दूरी पर ले जाकर क्षेत्र को खाली कराया। इसके बाद सूचना पुलिस अधिकारियों, एसएसआई नगर कोतवाली और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई गई।
घटना स्थल पर बीडीएस (बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वॉड) की टीम पहुंची, जिसने सेंसर, डिटेक्शन डिवाइस और डॉग स्क्वॉड की सहायता से संदिग्ध बैग की जांच की। प्रारंभिक संकेतों में बैग में संदिग्ध वस्तु होने की आशंका जताई गई। इसे देखते हुए क्षेत्र की तत्काल घेराबंदी की गई और एसओजी, एलआईयू, क्यूआरटी, फायर यूनिट, सिविल डिफेंस, एटीएस व मेडिकल टीमों को भी सक्रिय कर दिया गया। अस्पताल ले जाने वाले रूट को भी तुरंत खाली कराया गया, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई संभव हो। बाद में बैग को सुरक्षित तरीके से नियंत्रण में लिया गया और स्थिति सामान्य घोषित की गई।
दूसरे मॉकड्रिल में घंटाघर क्षेत्र में एक काल्पनिक ‘बंधक संकट’ की सूचना दी गई। इसमें दिखाया गया कि दो संदिग्ध व्यक्तियों ने कुछ लोगों को बंधक बना लिया है। सूचना मिलते ही एटीएस टीम ने रैपिड एक्शन के साथ मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। कुछ ही मिनटों में ‘अपराधी’ को न्यूट्रलाइज कर ‘बंधकों’ को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। यह अभ्यास एटीएस की ऑपरेशनल क्षमता और त्वरित प्रतिक्रिया का परीक्षण था। तीसरे अभ्यास में कंट्रोल रूम को सुभाष घाट के पास एक चाय की दुकान में आग लगने की सूचना दी गई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कम समय में आग पर नियंत्रण पा लिया गया। इस अभ्यास में फायर ब्रिगेड के रिस्पॉन्स टाइम और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में आग बुझाने की तकनीक का परीक्षण किया गया।
इंसीडेंट कमांडर एसपी क्राइम जितेंद्र मेहरा ने बताया कि इस मॉकड्रिल का उद्देश्य किसी भी बड़ी घटना की स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, रिस्पॉन्स टाइम और आपातकालीन कार्यवाही की क्षमता को परखना था। उन्होंने कहा कि ऐसे अभ्यास समय-समय पर इसलिए किए जाते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वास्तविक संकट की स्थिति में प्रशासन कम से कम समय में स्थिति को नियंत्रित कर सके और किसी भी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके। पूरे अभ्यास के दौरान एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह, एएसपी सदर निशा यादव, एएसपी ज्वालापुर जितेंद्र चौधरी, सीओ सिटी शिशुपाल नेगी, सीओ ट्रैफिक संजय चौहान, अग्निशमन अधिकारी वंश बहादुर यादव, एलआईयू इंस्पेक्टर विवेक तथा विभिन्न थानों के इंचार्ज व पुलिस बल मौजूद रहे। विस्तृत सुरक्षा व्यवस्था और कुशल समन्वय को देखकर क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली।





