
शाहजहांपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज में घायल छात्र की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर जमकर हंगामा किया। इस दौरान ट्रॉमा सेंटर में तोड़फोड़ हुई और पुलिस पर मृतक के पिता को घसीटकर चौकी ले जाने का आरोप लगा, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है। घटना के बाद पुलिस और प्रशासन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
- वंदे भारत की चपेट में आए छात्र की मौत, परिजनों का फूटा गुस्सा
- मोर्चरी में जिंदा था छात्र? डॉक्टरों पर गंभीर आरोप
- वायरल वीडियो में पुलिस पर पिता को घसीटने का आरोप
- ट्रॉमा सेंटर में तोड़फोड़, डॉक्टरों और स्टाफ में आक्रोश
शाहजहांपुर। शाहजहांपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक घायल छात्र की मौत के बाद हालात उस समय बेकाबू हो गए, जब परिजनों ने इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। मामला इतना बढ़ गया कि ट्रॉमा सेंटर में तोड़फोड़ की गई और पुलिस को सख्ती बरतनी पड़ी। इस दौरान मृतक छात्र के पिता को घसीटकर चौकी ले जाने का आरोप लगा है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, निगोही थाना क्षेत्र के ढकिया तिवारी गांव निवासी अंकित चौहान (16) रविवार को मेरठ-वाराणसी वंदे भारत ट्रेन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। वह इंटरमीडिएट का छात्र था। हादसे के बाद उसे उपचार के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहां कुछ समय बाद उसकी मौत हो गई। मृतक के पिता विमलेश चौहान का आरोप है कि हादसे के बाद भी उनका बेटा जीवित था और सांसें चल रही थीं, लेकिन डॉक्टरों ने समय पर इलाज नहीं किया।
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उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर उन्हें कहा गया कि अंकित की मौत हो चुकी है और शव मोर्चरी में रख दिया गया है। जब वे मोर्चरी पहुंचे तो उन्होंने देखा कि बेटे की सांसें चल रही थीं, इसके बावजूद इलाज से इनकार कर दिया गया। इलाज न मिलने से आक्रोशित परिजनों ने ट्रॉमा सेंटर में हंगामा शुरू कर दिया और तोड़फोड़ की। इस दौरान मरीजों और तीमारदारों में भगदड़ मच गई। कई लोग डर के मारे गैलरी, शौचालय और दवा स्टोर में छिप गए। डॉक्टर भी अपने कक्षों में चले गए। बताते हैं कि इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात एक जूनियर महिला डॉक्टर का यह पहला दिन था, जो हंगामे से घबराकर चली गईं।
परिजनों का आरोप है कि हंगामे के दौरान पुलिस ने मृतक के पिता विमलेश चौहान के साथ मारपीट की और उन्हें घसीटते हुए मेडिकल कॉलेज परिसर में बनी चौकी तक ले गई। उनके साथ परिवार के दो अन्य सदस्यों को भी हिरासत में लिया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, हालांकि पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है। एक घंटे बाद सभी को छोड़ दिया गया। वहीं पुलिस का कहना है कि परिजन बेवजह आरोप लगाकर हंगामा कर रहे थे, जिससे अन्य मरीजों को परेशानी हो रही थी। एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि हादसा रील बनाने के दौरान हुआ है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कार्रवाई की बात कही है।
घटना के बाद ट्रॉमा सेंटर में तैनात चिकित्सकों में भारी आक्रोश है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एमपी गंगवार ने घटना को निंदनीय बताते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। वहीं मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि मारपीट और तोड़फोड़ के संबंध में पुलिस को तहरीर दी जा रही है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था, पुलिस व्यवहार और मरीजों के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।








