
सुनील कुमार माथुर
गौतमचंद बोहरा द्वारा रचित “दरिया दोहों का” काव्य संग्रह दो पंक्तियों वाले दोहों के माध्यम से जीवन, समाज और मानवीय भावनाओं को अत्यंत सरलता, शालीनता और प्रभावशाली शैली में व्यक्त करता है। हर दोहा अपनी जगह पर पूर्ण, मार्मिक और विचारोत्तेजक है। रचनाकार ने बिना किसी लाग-लपेट के समाज की हकीकत, मानवीय संवेदनाओं और जीवन की गहराइयों को सहज, सरल और सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है, जो अत्यंत सराहनीय है।
लेखक ने केवल दो पंक्तियों में ही गहन भावों को समेटने का अद्भुत कौशल दिखाया है। संग्रह में दोहों को शिक्षाप्रद, प्रभुभक्ति, राजनीति, रिश्ते, मित्रता, रूढ़ियाँ, ग्राम्य जीवन, धर्म, पर्यावरण, साहित्य, गुरु, व्यसन, देशभक्ति, श्रृंगार, भ्रष्टाचार, नारी, फैशन, लालच और उपदेश जैसे विविध विषयों में वर्गीकृत किया गया है। विषयों की यह व्यापकता पुस्तक को बहुआयामी और पठनीय बनाती है।
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अपनी सटीक, सारगर्भित और मुखर लेखनी से बोहरा ने इन दोहों के माध्यम से “गागर में सागर” भरने का प्रशंसनीय प्रयास किया है। भावों को चुनिंदा शब्दों में पिरोकर पाठकों तक पहुँचाने की उनकी क्षमता पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता है। यह संग्रह पाठकों को नई सोच, नई दिशा और एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करने में सक्षम है।
पुस्तक: दरिया दोहों का (काव्य संग्रह)
रचियता: गौतमचंद बोहरा
पृष्ठ: कुल 148 (जिसमें 4 कवर पृष्ठ और 2 पृष्ठ अनुक्रमणिका के अतिरिक्त हैं)
मूल्य: 249 रुपये
प्रकाशक: द राइट आर्डर, नसादिया टेक्नोलॉजीज़ प्रा. लि., कोरमंगला, बैंगलोर–560029 (द राइट आर्डर पब्लिकेशंस)
समीक्षक:
सुनील कुमार माथुर
सदस्य, अणुव्रत लेखक मंच
स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार
जोधपुर, राजस्थान









Nice