पिथौरागढ़ जिले में एचआईवी संक्रमण का खतरा युवाओं के साथ-साथ बुजुर्गों पर भी मंडराने लगा है। जिला क्षय रोग विभाग के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 60 से 75 वर्ष की आयु के 35 बुजुर्ग इस वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। इनमें से अधिकांश पुरुष हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इन मामलों की पड़ताल में पाया गया कि सभी संक्रमित शारीरिक संबंध बनाने के कारण इस वायरस की चपेट में आए। आमतौर पर एचआईवी संक्रमण को युवा वर्ग से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन सीमांत जिले में अब बुजुर्गों में भी इसका प्रसार चिंता का विषय बन गया है।
जिला क्षय रोग विभाग के अनुसार, पिछले नौ वर्षों में जिले में कुल 530 एचआईवी संक्रमित मरीज दर्ज किए गए हैं। इनमें से 35 मरीज 60 से 75 वर्ष आयु वर्ग के हैं। इनमें 32 पुरुष और तीन महिलाएं शामिल हैं। सभी संक्रमित मरीज वर्तमान में इलाज करा रहे हैं। विभाग की जांच में सामने आया कि शारीरिक संबंधों के कारण संक्रमण का प्रसार बुजुर्गों तक भी हुआ है।
एचआईवी संक्रमण का दायरा केवल युवाओं और वयस्कों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों में भी इसके मामले सामने आए हैं। जिले में अब तक 14 बच्चे एचआईवी से संक्रमित मिले हैं, जिनकी उम्र चार से 12 वर्ष के बीच है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इन बच्चों को संक्रमण उनके माता-पिता से मिला है। आंकड़ों के मुताबिक, 478 मरीज शारीरिक संबंधों से संक्रमित हुए, जबकि 38 अन्य कारणों से इस बीमारी की चपेट में आए।
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चिकित्सकों का कहना है कि फेफड़ों में संक्रमण, लगातार खांसी, बुखार, सांस लेने में कठिनाई, वजन कम होना, अत्यधिक पसीना आना, छाले पड़ना, उल्टी-दस्त, सिरदर्द और निमोनिया जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत एचआईवी की जांच करानी चाहिए। प्रभारी, क्षय रोग विभाग पिथौरागढ़, डॉ. ललित भट्ट ने बताया कि विभाग लगातार एचआईवी जांच कर रहा है और लोगों को भी इस मामले में सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लक्षण दिखने पर जांच में देर नहीं करनी चाहिए, ताकि समय पर इलाज संभव हो सके।
पिथौरागढ़ में एचआईवी के मामले जिस तरह बुजुर्गों में भी सामने आ रहे हैं, वह न केवल स्वास्थ्य विभाग के लिए बल्कि समाज के लिए भी चेतावनी है। यह संक्रमण अब आयु की सीमाओं को तोड़ते हुए हर वर्ग को प्रभावित कर रहा है।







