
अरांई (अजमेर)। साहित्यिक और शैक्षणिक क्षेत्र में निरंतर सक्रियता से अपनी पहचान बना चुके गणपत लाल ‘उदय’, जिन्हें सैनिक कवि के नाम से भी जाना जाता है, को वर्ष 2025 के दो प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है। उन्हें आर्या पब्लिकेशन, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) द्वारा “स्वर्णिम शिक्षक गौरव रत्न अवॉर्ड-2025” तथा मधुशाला प्रकाशन, भरतपुर (राजस्थान) द्वारा “उत्कृष्ट रचनाकार सम्मान-2025” से सम्मानित किया गया है।
इस अवसर पर प्रकाशित साझा काव्य संग्रह “नव संवत्सर” का विमोचन नव वर्ष 2025 के आगमन पर किया गया, जिसमें देशभर के विशिष्ट रचनाकारों की उत्कृष्ट रचनाएं सम्मिलित की गई थीं। इस काव्य संकलन का संपादन सौरभ पांडेय और विजय कुमार शर्मा द्वारा किया गया है। संग्रह की विशेषता यह रही कि इसका प्राक्कथन स्वयं मुख्यमंत्री राजस्थान श्री भजनलाल शर्मा ने “नव संवत्सर: समझे सृष्टि के नव संदेश के क्या हैं निहितार्थ” विषय पर लिखा। वहीं, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने “आदर्शों को अपनाते हुए आगे बढ़ने का पर्व है भारतीय नववर्ष” शीर्षक से भूमिका लिखी। इस पुस्तक का ISBN 978-81-19960-88-0 है।
दूसरी ओर, मधुशाला प्रकाशन द्वारा प्रकाशित “गुलदस्ता” नामक साझा काव्य संग्रह भी साहित्य प्रेमियों के बीच विशेष चर्चा में है। इस संग्रह का संपादन हार्वर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक नवनीत कुमार शुक्ल ने किया है। इस संग्रह में देशभर के 35 प्रख्यात कवियों और कवित्रियों की उत्कृष्ट रचनाएं प्रकाशित की गई हैं। इसका ISBN 978-93-48422-79-8 है। दोनों ही पुस्तकें अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन प्लेटफार्म पर भी उपलब्ध हैं।
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गणपत लाल उदय ने इंडिया पोस्ट के माध्यम से प्राप्त इन दोनों सम्मानों—पुस्तकों, ट्रॉफियों एवं सम्मान पत्रों—को बड़े गर्व से साझा करते हुए कहा, “यह सम्मान न केवल मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उन सभी शिक्षकों, कवियों और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले साहित्य प्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो निरंतर रचना करते रहते हैं।” उदय की लेखनी में सैनिक भावना, समाज सेवा और अध्यात्म का गहरा समावेश है। उनके कार्यों ने यह प्रमाणित कर दिया है कि साहित्य सेवा के साथ-साथ यदि शिक्षा और नैतिक मूल्यों को साधा जाए, तो व्यक्ति केवल रचनाकार ही नहीं बल्कि समाज निर्माता बन सकता है।
जय हिन्द, जय हिन्दी, जय हिन्दुस्तान।








