आगरा | तकनीकी योग्यता और सरकारी सेवा की भावना का इस्तेमाल जब गलत रास्ते में हो, तो वह समाज के लिए कितना घातक बन सकता है, इसका ताजा उदाहरण है आगरा में पकड़ा गया एक साइबर ठग नेटवर्क, जिसका संचालन एक मैकेनिकल इंजीनियर कर रहा था। पुलिस ने इस गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य मास्टरमाइंड अभी फरार है।
एक जनसेवा केंद्र, जो बन गया ठगी का अड्डा
आगरा के बोदला क्षेत्र में कम्युनिकेशन साइबर कैफे नाम से एक जनसेवा केंद्र संचालित करने वाला अभय वर्मा, मूलतः मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर चुका है। जनसेवा केंद्र के माध्यम से वह आधार अपडेट, पैन कार्ड, बैंकिंग जैसी सुविधाएं मुहैया कराता था। लेकिन इसी केंद्र को उसने चार महीने पहले आयुष नाम के व्यक्ति से मुलाकात के बाद साइबर अपराध का अड्डा बना डाला।
आयुष और उसका साथी मुकेश, गेमिंग ऐप्स और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के नाम पर ठगी की बड़ी स्कीम चला रहे थे। उन्हें केवल बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक और क्यूआर कोड्स की जरूरत थी — और अभय ने यह जरूरत पूरी कर दी। शुरू में वह महज़ 2% कमीशन पर ठगों को खाते उपलब्ध कराने लगा, लेकिन जब उसने इसमें भारी मुनाफा देखा तो वह खुद ठगी का हिस्सा बन बैठा।
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हर दिन दो लाख तक खाते में आता था पैसा
जांच के दौरान सामने आया कि अभय के जरिए ठगों को जो बैंक खाते मिले, उनमें रोज़ाना दो लाख रुपये तक ट्रांसफर होते थे। कुल मिलाकर अब तक करीब 3 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी की राशि 40 से ज्यादा खातों में पहुंच चुकी है।
कर्मचारियों को भी बना लिया पार्टनर
अभय ने अपने साथ काम करने वाले कुंदन उर्फ कार्तिक और प्रियांशु को भी इस खेल में शामिल कर लिया। वे लोग मजदूरों, ठेले वालों और निम्नवर्गीय लोगों से उनका खाता खुलवाते या मौजूदा खाता किराए पर लेते। बदले में कुछ कमीशन देकर उनके खातों में ठगी की राशि डाली जाती और फिर निकाली जाती थी।
अभय ने पुलिस को बताया कि एक बार जब उसने ठगों की रकम लौटाने से मना किया तो आयुष ने धमकी दी और अपने नेटवर्क से संपर्क कराया। उसके बाद अभय ने छह प्रतिशत कमीशन पर सीधे पैसा जमा कराना शुरू कर दिया। वह राशि निकालकर कैश डिपॉजिट मशीन से आगे के खातों में डालता था, ताकि ट्रैकिंग से बचा जा सके।
गिरफ्तार हुए आरोपी:
- अभय वर्मा – जनसेवा केंद्र संचालक, सेक्टर-4, आवास विकास कॉलोनी
- कुंदन उर्फ कार्तिक – निवासी नौबस्ता
- प्रियांशु – निवासी सेक्टर-8, आगरा
मुख्य आरोपी फरार:
- आयुष और उसका सहयोगी मुकेश, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें गठित की गई हैं।
पुलिस की कार्यवाही
डीसीपी सिटी के अनुसार, साइबर थाना प्रभारी उत्तम चंद पटेल के नेतृत्व में बिचपुरी रोड पर की गई चेकिंग के दौरान इन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इनके कब्जे से कई बैंक दस्तावेज, एटीएम कार्ड, पासबुक, मोबाइल फोन और नगद राशि बरामद की है। अब पुलिस इस पूरे रैकेट की कड़ियों को जोड़ने में लगी है। जिन खातों में पैसे भेजे गए, उन्हें ट्रैक किया जा रहा है और आगे इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है।







