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बच्चों को प्रोत्साहित करें, बच्चों के भीतर की कला एवं हुनर उस पौधे के समान है जो समय के साथ बढ कर वटवृक्ष बन कर अपनी छाया, फलों, ताजी और शुद्ध हवा व हरी भरी पतियों के साथ मिलकर जहां हमें गर्मी से राहत दिलाता है अपितु पक्षियों को अपनी शाखाओं में आसरा बना कर रहने की भी व्यवस्था करते है… #सुनील कुमार माथुर, जोधपुर, राजस्थान
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मदर्स-डे पर 12 मई, रविवार को सुपर स्टार सिंगर कार्यक्रम में बच्चों ने शानदार प्रस्तुति देकर सभी दर्शकों का मन मोह लिया। बच्चों ने एक के बाद एक गाने गाकर यह साबित कर दिया कि अगर बच्चों को बचपन से ही उसकी प्रतिभा को निखारने का मौका दिया जाये तो वे किसी से कम नहीं है। चूंकि हिम्मत की कीमत है।
अतः अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों पर जबरन अपनी अधूरी रही इच्छाएं नही थोपे। अपितु बच्चों की इच्छाओं और जिज्ञासाओं को पंख दीजिए ताकि वे अपना हुनर देश और दुनियां के सामने कम उम्र में ही प्रस्तुत कर यह साबित कर सकें कि वे भी किसी से कम नहीं है। बच्चों की जिज्ञासाओं को उडान देने का काम एक मां ही है जो उसे बखूबी तरीके से निभा सकती है।
पढाई के वक्त बच्चों को खूब मन लगाकर पढाई करने दीजिए और खेल के वक्त खेल व मनोरंजन के वक्त भरपूर मनोरंजन करने दीजिए।रचनात्मक कार्य से ही मन और मस्तिष्क को आराम मिलता है और उस ताजगी में बच्चे काफी उत्साह के साथ आगे बढ जाते है। बस समय समय पर उनका हौसला अफजाई करते रहिए।
बच्चों के भीतर की कला एवं हुनर उस पौधे के समान है जो समय के साथ बढ कर वटवृक्ष बन कर अपनी छाया, फलों, ताजी और शुद्ध हवा व हरी भरी पतियों के साथ मिलकर जहां हमें गर्मी से राहत दिलाता है अपितु पक्षियों को अपनी शाखाओं में आसरा बना कर रहने की भी व्यवस्था करते है, ठीक उसी प्रकार बच्चे अपनी प्रतिभा को निखार कर घर, परिवार, समाज और राष्ट्र का मान सम्मान और गौरव बढाते है।
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