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दीपिका ने अजमेर से पोस्ट ग्रेजुएशन किया हैं। उनका कहना है कि ड्राईंग मेरा पैशन हैं। वे बताती है कि किसी भी कलाकार को अपनी कला को मुकाम तक पहुंचाने के लिए कितना संघर्ष करना पडता है, इसे वही महसूस कर सकता है। #कार्यालय संवाददाता
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जोधपुर। कहते हैं कि कोई भी काम आसान नहीं होता है और अगर आप उसे दिल से करते हो तो कोई भी काम मुश्किल भी नहीं होता हैं। जहां लगन है आत्मविश्वास है और दृढ इच्छा शक्ति है तो सफलता आपके कदम अवश्य ही चूमेगी। इसमे़ कोई दो राय नहीं है। मीरा की नगरी मेडता सिटी निवासी जुगल किशोर अग्रवाल की पुत्री दीपिका अग्रवाल ड्राईंग व आर्ट के क्षेत्र में महत्ती भूमिका अदा कर रही हैं।
स्केच आर्टिस्ट दीपिका पेंटिंग के लिए आंयल कलर का ही उपयोग करती है। साथ ही वो पेंटिंग को केनवास सीट पर बनाती है। उसने बताया कि डाईंग व स्केच बनाना उसने आन लाइन माध्यम से सीखा व आज इस कार्य में पूरी तरह से निपूर्ण हो चुकी है। उन्हें नयी नयी पेंटिंग व डाईंग बनाना बेहद पसंद हैं।
दीपिका अग्रवाल ने साहित्यकार सुनील कुमार माथुर को एक साक्षात्कार में बताया कि उसने अब तक चारभुजा नाथ, भगवान गणेश जी, वीर हनुमान सहित अनेक देवी देवताओं की डाईंग बनाई है और हाल ही में मीरां स्मारक, मेडता सिटी के मुख्य प्रवेश द्वार और राजस्थान के पारंपरिक स्लोगन पधारो म्हारे देश पर नृत्य करते हुए पेंटिंग बनाई है। दीपिका को प्राचीन विरासत और संस्कृति को उकेरने का बेहद शौक है। उन्होंने अभी हाल ही में हुबहू मीरां स्मारक का प्रवेश द्वार बनाया हैं।
दीपिका ने अजमेर से पोस्ट ग्रेजुएशन किया हैं। उनका कहना है कि ड्राईंग मेरा पैशन हैं। वे बताती है कि किसी भी कलाकार को अपनी कला को मुकाम तक पहुंचाने के लिए कितना संघर्ष करना पडता है, इसे वही महसूस कर सकता है। दरअसल सफलता सबको नजर आती है लेकिन संघर्ष किसी किसी को ही दिखाई देता है। बुरा दौर हर किसी के जीवन में आता है लेकिन जीत उसी की होती है जो आशावादी होता है।









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