
राजीव कुमार झा
धैर्य के अभाव में अक्सर लोग किसी कार्य में मनोनुरूप प्रतिफल के अभाव में उद्विग्नता के भावों को प्रकट करते हैं और हम सब को इससे बचना चाहिए…
धैर्य मनुष्य के जीवन का जरूरी गुण है और संकट के समय यह विपत्ति में हमें स्थिरता प्रदान करता है. धैर्य को संस्कृत में धृति कहा जाता है और इसके बिना जीवन संघर्ष में हमारी प्रवृत्तियां अस्थिर बनी रहती हैं . धैर्य धारण करने वाले को धैर्यवान कहा जाता है और संसार में महान कार्यों को संपन्न करने वाले लोगों ने धैर्य को अपने जीवन में अपनाया और इसके सहारे उन्होंने सफलता प्राप्त की.
इस बारे में कई लोगों का उदाहरण सामने है. कर्ण को महाभारत का महान कहा जाता है लेकिन संसार का महान धनुर्धर बनने के पहले जीवन में उसे अपार संकटों से गुजरना पड़ा था और उसने जीवन की परीक्षा की घड़ियों में धैर्य का परिचय दिया था. जीवन में जिन लोगों में धैर्य की कमी होती है, वे लोग प्रायः विपरीत परिस्थितियों में घबरा जाते हैं और अपना काम ठीक से नहीं कर पाते हैं.
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वह सुख – दुख में अविचलित रहता है. शांति प्रेम और सहिष्णुता के स्थायी मनोभावों को धैर्य कहा जा सकता है. धैर्य के अभाव में अक्सर लोग किसी कार्य में मनोनुरूप प्रतिफल के अभाव में उद्विग्नता के भावों को प्रकट करते हैं और हम सब को इससे बचना चाहिए क्योंकि जीवन में बराबर मनोनुकूल परिस्थितियां ही नहीं होती.
राम ने सीता हरण के बाद धैर्य धारण किया था और कई बार हमें जीवन में तबाही बर्बादी का सामना करना पड़ता है . धैर्य हमें इन स्थितियों में आगे जीवनपथ पर अग्रसर करता है.
¤ प्रकाशन परिचय ¤
![]() | From »राजीव कुमार झाकवि एवं लेखकAddress »इंदुपुर, पोस्ट बड़हिया, जिला लखीसराय (बिहार) | Mob : 6206756085Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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