
बलदेव चंद्र भट्ट
पुलिस समाचार, देहरादून | 98973 89750
क्या है मोदी लहर ॽ 1947 में देश आजादी के समय जिस प्रकार मुस्लिम लीग अर्थात जिन्ना ने धर्म के आधार पर पाकिस्तान की नींव रखी थी और उसका निर्माण किया था उस पाकिस्तान में मुस्लिम प्रबल होते गए और हिंदू हासिये में जाते रहे। 2014 आते -आते पाकिस्तान लगभग हिंदू विहीन राष्ट्र की श्रेणी में आ गया।
इसके उलट भारत के लोगों ने जिस अरमान में पाकिस्तान को अलग होने दिया था कि पाकिस्तान धर्म के आधार पर अलग हो रहा है तो वैसा ही नजारा भारत में भी देखने को मिलेगा अर्थात भारत हिंदू राष्ट्र नहीं तो हिन्दूओं का बोलबाला जरूर भारत में रहेगा लेकिन 19 89 तक पूरी तरह से भारत में कांग्रेस का राज होने के कारण देश में हिंदू का वर्चस्व तो स्थापित नहीं हो पाया परंतु उल्टा जरूर हुआ शासन का सुख भोगने के लिए कांग्रेस ने हिंदूओं, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैनो का दमन करते हुए केवल वोट बैंक की राजनीति करते हुए अल्पसंख्यकों के नाम पर मुसलमानों को इस देश का कर्ता-धर्ता बना दिया।
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उनके हर गलत व रूढवादी परंपराओं को भी इस देश की संस्कृति मानते हुए उनके अंदर छुपे हुए अंधविश्वास, रूढवादिता, कट्टरता व आपराधिकता, अलगाववादी व आतंकवादी छवि पर हमेशा पर्दा डालने व बचाने की प्रवृत्ति ने धीरे धीरे हिंदुओं को इसका एहसास कराते हुए एकजुटता व संगठित होने के लिए प्रेरित किया इसका परिणाम यह हुआ कि 2002 के गोधरा कांड के बाद गुजरात सरकार ने जो सक्षमता दिखाई थी उसके प्रतीक मोदी जी को हिंदू नेता मान लिया था। जब 2014 में मोदी जी ने अल्पसंख्यक बनाम बहुसंख्यक का नारा देते हुए राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा तो भारत का पूरा हिंदू समाज उनसे आशा करते हुए उनके कदम पर कदम मिलाता चला गया और दशकों बाद एक पूर्ण बहुमत की सरकार केंद्र में स्थापित हो गई।
यह थी मोदी लहर। जब वह निरंतर ऐतिहासिक फैसले लेते गए व राष्ट्र से संवाद स्थापित करते हुए व निरंतर विकास एवं आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करते हुए आगे बढ़ने लगे तो कांग्रेस रसातल में जाती रही और 2019 में फिर से पूर्ण बहुमत मोदी जी को चला गया। आज भी मोदी जी किसी जाति, धर्म, मजहब के खिलाफ नहीं है वह सबका साथ, सबका विकास, व सबका विश्वास के नारे के साथ देश को आगे बढ़ाना चाह रहे हैं तो कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल उन्हें मुस्लिम विरोधी बताने में लगी है जिससे हिंदू समाज और संगठित हो रहा है जिसका प्रभाव 2024 के चुनाव में भी देखने को मिल सकता है।
2024 में भी मोदीजी प्रचंड बहुमत से सरकार बना ले तो अचंभा नहीं होगा। मोदी लहर तब तक भारत में कायम रहेगी जब तक विपक्ष वोट बैंक की राजनीति छोड़कर अच्छे को अच्छा व बुरे को बुरा कहना व समझना शुरू नहीं करेगा, बुराई और विडंबना जिस किसी भी धर्म में हो वह देश हित में सही नहीं है चाहे वह हिंदू धर्म में हो या मुस्लिम धर्म में या किसी और धर्मों में। हमारे नेताओं को उसका खंडन मोदी जी की तरह करना ही होगा अन्यथा कोई भी मोदी लहर को खत्म नहीं कर पाएगा।
कांग्रेस इसी भूल की कीमत चुका रही है उसने हिंदुओं को हमेशा अपने बाप की बपौती समझते हुए मुसलमानों को रिझाने की कोशिश में लगी रही और कुछ समय तक कामयाब भी होती रही। जब अन्य राजनैतिक पार्टियां भी उसी राह पर चलने लगी तो मुस्लिम भी बटते चले गए और उनके अंदर भी मतभेद शुरू हो गए जिससे अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दल मुसलमानों के रहनुमा बनते चले गए बाद में इन दलों के बीच में ही टकराव होने शुरू हो गए।
पार्टियां किसी राज्य स्तर में तो सक्षम है पर राष्ट्रीय स्तर में नहीं। आज भी मोदी मैजिक को तोड़ना है तो इन सारे दलों को आपस के मतभेद बुलाकर केवल विपक्ष की एकमात्र राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस की छत्रछाया में आते हुए 2024 का चुनाव लड़ना पड़ेगा क्योंकि कांग्रेेस ही भारत की एकमात्र ऐसी राष्ट्रीय पार्टी है जो भले ही आज कमजोर जरूर हुई हो पर उस का संगठन देश के हर राज्य, मंडल, जिले,ब्लॉक व गांव-गांव तक फैला है आज भी लोग देश के हर कोने और गांव से उसी से आशा लगाए बैठे हुए हैं। पर आपसी अहंकार व सत्तालोभ में विपक्ष से ऐसी उम्मीद कम ही नजर आती है। स्वयं मोदी जी भी चाहते हैं कि देश का विपक्ष मजबूत हो यही लोकतंत्र की खूबसूरती है पर ऐसा कर पाना विपक्ष के लिए टेढ़ी खीर नजर आती है।






