
कृतिका द्विवेदी ‘कृति’
सीधी, मध्य प्रदेश

चूड़ी बिंदिया काजल के श्रृंगार गीत नही गाती हूं
ना छन-छन करती पायलिया के संगीत सुनाती हूँ ।
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ना नायक और नायिका के आलिंगन का वर्णन करती
अपनी कलम किताबों को मधुमास नही अर्पण करती।
राष्ट्रप्रेम से पृथक रहे जो ऐसे वाक्य न बतलाऊं
देशप्रेम को छोड़ के दूजा काव्य नही मैं सिखलाऊं।
नही किसी प्रलोभन या लालच में मेरी कलम नहीं बिकती
वीरो के वंदन के अलावा कोई भाव नही लिखती।
हँसी ठिठोली हास्य-व्यंग कभी नहीं जुड़ पाती हूँ,
भावो में भी भगत सिंह के भारत का चित्र बनाती हूं।
मणिकर्णिका कि वंशज मै बात यही दोहराती हूं
आत्मसमर्पण के बदले मरने का पाठ पढ़ाती हूं…..।







