
सुनील कुमार माथुर
सत्संग एक तरह का गुरू मंत्र होता है जो व्यक्ति को सही राह दिखाता है और उसमे ईश्वर के प्रति प्रेम जागृत करता हैं । सत्संग , भजन – कीर्तन व कथा करने एवं सुनने से मन को अपार शांति की प्राप्ति होती है और व्यक्ति अपने आपको हल्का महसूस करता हैं । वही मन प्रसन्न रहता है । अतः मनुष्य को नियमित रुप से ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए ।
हमारा मन कभी भी भरता नहीं है । एक इच्छा की पूर्ति हो ही नहीं पाती है कि मन में दूसरी , तीसरी और चौथी इच्छा जागृत हो जाती है । अतः अपने मन पर नियंत्रण कीजिये और बढती इच्छाओं पर रोक लगाईये । इच्छाओं पर कंट्रोल कीजिए और मन को प्रभु की भक्ति में लगाईये और जीवन को भक्तिमय बनायें ।
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ईश्वर ने हमें इस नश्वर संसार में भौतिक सुख सुविधाओं को भोगने के लिए नही भेजा है अपितु ईश्वर की भक्ति करने के लिए भेजा है । लेकिन हम ईश्वरीय भक्ति को तो भूल गये या उसे एक ओर कर दिया और भौतिक सुख सुविधाओं को भोगने में लग गये । यही कारण है कि आज हम अपने मन के मेल को ( बुराइयों को ) धो नहीं पाए । यह मेल किसी साबुन या डिटर्जेन्ट पाउडर से साफ होने वाला नहीं है अपितु निस्वार्थ भाव से ईश्वर की भक्ति से ही दूर हो सकता हैं ।
आज समाज में जो अपराध बढ रहे है उसका मूल कारण यही है कि आज हम ईश्वर की भक्ति से दूर होते जा रहे हैं और धन – दौलत को ही सब कुछ व माई बाप मान लिया है । यह हमारी सबसे बडी भूल हैं नतीजन आदर्श संस्कारों के अभाव में इंसान अपराध कर रहा है । वह देश भक्ति की भावना को भूल कर गलत लोगों के हाथों की कठपुतली बन कर अपने ही समाज व राष्ट्र को नुकसान पहुंचा रहा हैं जो चिंताजनक ही नहीं अपितु शर्मनांक बात है।
अस्थिर मस्तिक ही अपराध करता हैं और कराता है जबकि ईश्वर की भक्ति हमें शांति के साथ रहने की आदर्श कला सिखाती है जिससे आपसी प्रेम स्नेह, भाई-चारे की भावना व आपसी सौहार्द बढता है । अतः व्यक्ति को अपना जीवन प्रभु के श्री चरणों में अर्पित कर देना चाहिए । जो ऐसा करता है उसे कभी भी कष्ट नहीं झेलना पडता है चूंकि उसके सारे कष्ट भगवान हर लेते हैं । अतः नियमित रूप से भजन-कीर्तन करें और ईश्वर के नाम का स्मरण करें।
¤ प्रकाशन परिचय ¤
![]() | From »सुनील कुमार माथुरलेखक एवं कविAddress »33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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