
मनीष कुमार
बलिया, उत्तर प्रदेश
अभी तो पंख फैलाया है
उड़ान भरनी तो अभी बाकी है
हमने अभी मुट्ठी भर जमी मापी है
पूरी ब्रम्हांड मापनी बाकी है…।
दृढ़ संकल्प कर पथ पर चले है
अपने सपनो को करने साकार चले है
मेरी उम्र भले ही छोटी सी सही
अपने सर सपनो का बड़ा आकार ले चले है…।
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तुम न समझो हमे छोटा सा
अभी तो हमने, बस शुरुआत की है
अभी तो पायी है, बस थोड़ी सी कामयाबियां
जिवन मे कामयाबियों कि ढेर लगानी बाकी है…।
अभी हमने तो बस शुरुआत की है
सबकी दिलो पर राज करनी बाकी है
हमने अभी जमी मापी है बस मुठ्ठी भर
पूरी ब्रम्हांड मापनी बाकी है…।
एक बात बता दु मै उनको
जो मेरी कामयाबियों से जला करते है
कि वो क्या बराबरी करेंगे हमारी
क्योंकि हम आज भी उनकी सम्मान करते है…।
अभी तो मापी है, बस मुठ्ठी भर जमी हमने
पुरी की पूरी ब्रम्हांड मापनी बाकी है
अभी तो बस पंख फैलाया है
उड़ान भरनी तो अभी बाकी है…।







